परिमल नाथवाणी का झारखंड से जुड़ाव: 2008 से कर्मभूमि, इस्लामनगर की खास यादें

Jharkhand Political Journey

रांची: राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने बताया कि वर्ष 2008 मेरे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। पहली बार राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद झारखंड से मेरा रिश्ता केवल राजनीतिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहा। उन्हीं दिनों यह एहसास मजबूत होने लगा कि झारखंड अब मेरी कर्मभूमि है। झारखंड के लोगों के साथ संवाद, उनकी समस्याओं को समझना और अपनी क्षमता के अनुसार उनके लिए काम करने की कोशिश इसी भावना का हिस्सा रही।

इस्लामनगर से शुरू हुआ एक खास जुड़ाव
उन्हीं दिनों इस्लामनगर के लोगों के साथ भी मेरा जुड़ाव मजबूत हुआ। वहां के लोगों के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत जो कुछ भी संभव हुआ, उसे करने का प्रयास किया। भले ही किए गए प्रयास छोटे रहे हों, लेकिन उनके पीछे की भावना और लोगों के साथ बना संबंध मेरे लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

लोगों का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत
राजनीति में पद और जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं, लेकिन लोगों के साथ बना विश्वास लंबे समय तक कायम रहता है। इस्लामनगर के लोगों के साथ बिताए समय और उनके लिए किए गए प्रयासों ने झारखंड के प्रति मेरे जुड़ाव को और मजबूत किया। यही वजह है कि आज भी उन दिनों की तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं।

Adiwasi Mahotsav

वीडियो में उस दौर की खास झलक
प्रस्तुत वीडियो उसी दौर की कुछ यादों को सामने लाता है। इसमें इस्लामनगर के लोगों के साथ जुड़ाव और उस समय किए गए प्रयासों की एक झलक देखने को मिलती है। यह सिर्फ एक पुराना वीडियो नहीं, बल्कि झारखंड को कर्मभूमि मानने की उस भावना की याद है, जो 2008 के बाद लगातार मजबूत होती गई।

happy Teacher Day
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झारखंड से रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं
झारखंड से जुड़ाव को केवल राजनीतिक सफर के रूप में देखना अधूरा होगा। यहां के लोगों का अपनापन, विश्वास और स्नेह इस रिश्ते की सबसे बड़ी वजह रहा है। इस्लामनगर की ये यादें उसी लंबे सफर का एक हिस्सा हैं, जहां लोगों के साथ जुड़ाव ने झारखंड को कर्मभूमि मानने के भाव को और सार्थक बनाया

एक वीडियो, कई यादें
वर्ष 2008 से शुरू हुआ यह सफर आज भी उन रिश्तों और यादों के साथ आगे बढ़ रहा है। इस्लामनगर के लोगों के लिए किए गए प्रयासों की यह झलक उस समय की प्रतिबद्धता को याद करने का एक अवसर है। झारखंड मेरी कर्मभूमि है और इस्लामनगर से जुड़ी ये यादें उस रिश्ते की एक खास कहानी हैं।

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