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JPSC घोटाला: रिजल्ट से पहले WhatsApp पर भेजी गई थी Answer Key? CID का बड़ा दावा, श्वेता गुप्ता से दूसरे दिन भी पूछताछ

JPSC Answer Key WhatsApp

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच के दौरान एक बड़ा दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा परिणाम जारी होने से पहले तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान को व्हाट्सऐप के माध्यम से Answer Key भेजी थी।

रविवार को रिमांड के दूसरे दिन सीआईडी ने श्वेता कुमारी गुप्ता से इस संबंध में लंबी पूछताछ की। सीआईडी सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान वह इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। हालांकि, इस मामले में श्वेता गुप्ता की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

WhatsApp के जरिए साझा हुए गोपनीय दस्तावेज!
सीआईडी की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण एवं गोपनीय दस्तावेज हार्ड डिस्क, सुरक्षित सर्वर या पेन ड्राइव के बजाय WhatsApp के माध्यम से साझा किए गए।जांच एजेंसी का कहना है कि नियमानुसार ऐसे दस्तावेजों का आदान-प्रदान सुरक्षित और अधिकृत माध्यम से होना चाहिए था। ऐसे में WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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सीआईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना है और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।

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TDPL को बिना टेंडर दिया गया था काम?
पूछताछ के दौरान श्वेता कुमारी गुप्ता ने सीआईडी को बताया कि परीक्षा संचालन का जिम्मा टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) को नॉमिनेशन के आधार पर दिया गया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि—

  • कंपनी के चयन के लिए कोई खुली टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
  • कंपनी की पृष्ठभूमि (Background Verification) की विस्तृत जांच नहीं की गई।
  • आदेश के आधार पर ही परीक्षा संचालन का कार्य सौंप दिया गया।
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इन बिंदुओं की भी सीआईडी अलग से जांच कर रही है।

परीक्षा की गोपनीयता पर उठे सवाल
सीआईडी को आशंका है कि परीक्षा संचालन के दौरान जेपीएससी स्तर पर आवश्यक गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सीधे टीडीपीएल को सौंप दी गई थीं। इसी वजह से कंपनी के कुछ कर्मचारियों के पास परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज पहुंच गए और कथित तौर पर वे उन्हें अपने साथ घर तक भी ले गए। यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह परीक्षा संचालन की प्रक्रिया में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला माना जा सकता है।

कई पहलुओं पर जारी है जांच
सीआईडी फिलहाल कई बिंदुओं पर समानांतर जांच कर रही है। इनमें शामिल हैं—

  • Answer Key साझा किए जाने की परिस्थितियां।
  • WhatsApp चैट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच।
  • टीडीपीएल की नियुक्ति की प्रक्रिया।
  • परीक्षा संचालन के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था।
  • परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और कंपनी कर्मचारियों की भूमिका।

जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों का भी परीक्षण कर रही है।

अभी जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष बाकी
गौरतलब है कि सीआईडी ने जो बातें सामने रखी हैं, वे जांच के दौरान सामने आए दावे और प्रारंभिक निष्कर्ष हैं। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किसी भी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।

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