3-4 महीने से मजदूरी नहीं मिली, मोटिया मजदूरों का फूटा गुस्सा; 1 सितंबर से काम बंद की चेतावनी
रांची: झारखंड राज्य खाद्य निगम के प्रखंड गोदामों में कार्यरत मोटिया मजदूरों की बकाया मजदूरी का मामला अब आंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। एसएफसी मोटिया मजदूर संघ ने मजदूरों की समस्याओं को लेकर झारखंड राज्य खाद्य निगम, रांची के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा है। संघ का आरोप है कि प्रखंडों में कार्यरत मोटिया मजदूरों को पिछले 3 से 4 महीने से उनकी मेहनत की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सोनी ने पत्र के माध्यम से मजदूरों की आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हुए तत्काल बकाया भुगतान कराने की मांग की है।
मजदूरी नहीं मिलने से घरों में संकट
संघ का कहना है कि कई महीनों से मेहनत के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं होने से गरीब मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। मजदूरों के परिवारों में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। संघ के मुताबिक, नियमित आमदनी रुक जाने के कारण कई मजदूरों को अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। वहीं, कर्ज पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ भी मजदूरों की परेशानी बढ़ा रहा है। मजदूर संघ ने कहा है कि मजदूरों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लगातार काम किया, ऐसे में उनकी मेहनत की मजदूरी समय पर मिलना जरूरी है।
31 अगस्त तक भुगतान की मांग
एसएफसी मोटिया मजदूर संघ ने प्रबंध निदेशक से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित ठेकेदारों से बातचीत कर 31 अगस्त 2026 तक मजदूरों के पूरे बकाये का भुगतान कराने का आग्रह किया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर मजदूरों को उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

1 सितंबर से काम ठप करने की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि 31 अगस्त तक सम्पूर्ण बकाया भुगतान नहीं होने की स्थिति में 1 सितंबर 2026 से प्रखंड गोदामों में काम प्रभावित किया जाएगा।संघ के अनुसार, मोटिया मजदूर पहले चरण में रिसीट कार्य का बहिष्कार करेंगे। इसके बाद एसएफसी मोटिया मजदूर संघ के बैनर तले सभी संबंधित कार्यों को ठप कराने का निर्णय लिया जा सकता है। संघ ने इसके लिए भुगतान नहीं करने वाले संबंधित ठेकेदारों और प्रबंध निदेशक को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
मजदूरों की मांग पर अब प्रशासन की नजर
मोटिया मजदूरों की बकाया मजदूरी का मामला सामने आने के बाद अब निगाहें झारखंड राज्य खाद्य निगम प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो सितंबर की शुरुआत से प्रखंड स्तर पर खाद्य निगम के कामकाज पर इसका असर पड़ सकता है। मजदूर संघ ने साफ किया है कि उसका उद्देश्य मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित भुगतान दिलाना है। संघ ने प्रबंधन से विवाद को बढ़ने से पहले ही मामले का समाधान करने और मजदूरों के बकाये का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि 31 अगस्त की समय सीमा से पहले मजदूरों को उनका बकाया भुगतान मिलता है या फिर 1 सितंबर से मोटिया मजदूर आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं।





