JPSC विवाद में जमाल अहमद का बड़ा पलटवार! बोले- ‘अभय तिवारी को जानता तक नहीं, TDPL से कोई संबंध नहीं’
रांची: JPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच अब पूर्व JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। डॉ. जमाल अहमद ने स्पष्ट कहा है कि उनका अभय तिवारी या किसी भी बिचौलिये से कोई परिचय नहीं है और TDPL एजेंसी से भी उनका किसी तरह का संबंध नहीं रहा है। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए आरोपों की जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मिली है। CID की ओर से पूछताछ के लिए नोटिस जारी होने के बाद डॉ. जमाल ने अपनी भूमिका को लेकर यह सफाई दी है।
‘अभय तिवारी या किसी बिचौलिये से कोई परिचय नहीं’
डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि उनका अभय तिवारी से कोई परिचय नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी बिचौलिये के माध्यम से अभ्यर्थियों की पैरवी नहीं कराई और न ही परीक्षा प्रक्रिया में किसी बाहरी व्यक्ति के जरिए हस्तक्षेप किया। उनके मुताबिक मीडिया में उनके नाम को लेकर जो आरोप सामने आए हैं, वे उनके लिए भी हैरान करने वाले हैं। अब जांच एजेंसी के सामने महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद हैं और क्या कथित बयानों में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि होती है।
‘TDPL से मेरा कोई संबंध नहीं’
डॉ. जमाल अहमद ने परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी TDPL से किसी भी तरह के संबंध से भी इनकार किया है। उन्होंने कहा कि TDPL की कार्यप्रणाली को लेकर वे खुद संतुष्ट नहीं थे। यही वजह थी कि उन्होंने एजेंसी के कामकाज में सामने आई कथित अनियमितताओं और कमियों को सक्षम स्तर पर उठाया था। उनके मुताबिक उन्होंने इस संबंध में JPSC अध्यक्ष को पत्र भी लिखा था और एजेंसी की कार्यप्रणाली को उचित नहीं होने की बात स्पष्ट रूप से रखी थी।
‘मैंने खुद OMR की फॉरेंसिक जांच की मांग की थी’
डॉ. जमाल अहमद का सबसे महत्वपूर्ण दावा OMR शीट की जांच को लेकर है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं JPSC अध्यक्ष से OMR शीट की फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली उन्हें पारदर्शी और संतोषजनक नहीं लगी थी। इसलिए उन्होंने खुद को एजेंसी के काम से अलग रखने का अनुरोध भी किया था। अगर डॉ. जमाल द्वारा किए गए पत्राचार और OMR जांच की मांग के दस्तावेज जांच में उपलब्ध होते हैं, तो यह उनके बचाव के दावे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
CID ने पूछताछ के लिए जारी किया है नोटिस
डॉ. जमाल अहमद का यह बयान ऐसे समय आया है जब CID ने JPSC नियुक्ति परीक्षा मामले में पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस जारी किया है।यानी अब उन्हें जांच एजेंसी के सामने अपनी भूमिका और पूरे मामले से संबंधित जानकारी रखनी होगी। पूछताछ में एजेंसी उनसे TDPL की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया, OMR से संबंधित व्यवस्था और आयोग के भीतर लिए गए फैसलों को लेकर सवाल कर सकती है। वहीं डॉ. जमाल का कहना है कि उन्होंने तो खुद एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और OMR की फॉरेंसिक जांच की मांग की थी।
आरोप बनाम सफाई—अब जांच में क्या निकलेगा?
JPSC मामले में पहले सामने आए कथित बयानों में डॉ. जमाल अहमद का नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं अब डॉ. जमाल खुद सामने आकर उन आरोपों को पूरी तरह नकार रहे हैं। एक तरफ कथित बयान में बिचौलियों और अभ्यर्थियों की पैरवी से जुड़े दावे हैं…दूसरी तरफ डॉ. जमाल का कहना है कि उनका किसी बिचौलिये से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने खुद परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। यही विरोधाभास अब CID की जांच का अहम हिस्सा बनने वाला है।
असली सच दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से सामने आएगा
इस मामले में अब केवल बयान ही नहीं, बल्कि दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे। जांच एजेंसी यह देख सकती है कि—
- क्या डॉ. जमाल और अभय तिवारी के बीच कोई संपर्क था?
- क्या TDPL के अधिकारियों से उनका कोई आधिकारिक या अनधिकृत संपर्क रहा?
- क्या OMR फॉरेंसिक जांच की मांग से संबंधित पत्र वास्तव में दिया गया था?
- परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर आयोग के भीतर क्या आपत्तियां दर्ज हुई थीं?
- OMR और परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
इन सवालों के जवाब जांच को नई दिशा दे सकते हैं।
JPSC विवाद में बढ़ रही जांच की परतें
JPSC परीक्षा विवाद अब लगातार नई परतें खोल रहा है। TDPL की भूमिका, कथित OMR हेरफेर, परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, अभ्यर्थियों से कथित पैसे की वसूली और आयोग से जुड़े लोगों की भूमिका—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। ऐसे में डॉ. जमाल अहमद का बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता हैफिलहाल उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। अब असली परीक्षा CID की जांच की है—क्या एजेंसी उनके दावे को दस्तावेजों से सत्यापित करती है या जांच में कोई अलग तस्वीर सामने आती है?क्योंकि JPSC विवाद में अब हर बयान के पीछे एक सवाल है…कौन सच बोल रहा है और किसके दावे के पीछे सबूत हैं?






