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Jharkhand Mineral Transport: दूसरे राज्यों से बालू-गिट्टी लाने पर लगेगा शुल्क, बिना ISTP प्रवेश पर कार्रवाई

Jharkhand ISTP

झारखंड में जल्द लागू हो सकती है इंटर स्टेट ट्रांजिट पास व्यवस्था, ऑनलाइन लेना होगा पास

बिना अनुमति खनिज लदा वाहन पकड़े जाने पर हो सकता है जब्त

रांची : झारखंड में दूसरे राज्यों से आने वाले लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी और अवैध खनिज ढुलाई पर रोक लगाने के लिए सरकार नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के लिए भेजे जाने की तैयारी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा या अन्य राज्यों से बालू, गिट्टी और बोल्डर जैसे लघु खनिज लेकर झारखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए ऑनलाइन ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी वसूला जाएगा।

झारखंड की सीमा में प्रवेश से पहले लेना होगा ISTP
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों से खनिज लेकर झारखंड आने वाले वाहनों को राज्य की सीमा में प्रवेश करने से पहले ISTP पोर्टल पर ऑनलाइन ट्रांजिट पास लेना होगा। वाहन मालिकों को सबसे पहले पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद उन्हें यूनिक लॉग-इन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से संबंधित वाहन और खनिज की जानकारी दर्ज कर ट्रांजिट पास जारी कराया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में प्रवेश करने वाले खनिज लदे वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और उनके परिवहन को ट्रैक करना है।

चालान जारी होने के 6 घंटे के भीतर बनाना होगा पास
प्रस्तावित नियमों में समय सीमा भी तय की जा रही है। दूसरे राज्य की माइनिंग साइट से खनिज का चालान जारी होने के बाद अधिकतम छह घंटे के भीतर ISTP जेनरेट करना होगा। यदि निर्धारित समय के भीतर ट्रांजिट पास नहीं बनाया गया या कोई खनिज लदा वाहन बिना ISTP के झारखंड की सीमा में प्रवेश करता हुआ पाया गया, तो उसके परिवहन को अवैध माना जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित वाहन के खिलाफ कार्रवाई के साथ उसे जब्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

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बिहार के मॉडल से प्रेरित है व्यवस्था
झारखंड सरकार पड़ोसी राज्य बिहार में लागू अंतरराज्यीय खनिज परिवहन व्यवस्था को देखते हुए ISTP सिस्टम तैयार कर रही है। बिहार में 10 जून से राज्य की सीमा में लघु खनिज लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास शुल्क की व्यवस्था लागू की गई है। वहां बालू और पत्थर जैसे लघु खनिजों से लदे वाहनों से 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन अथवा 85 रुपये प्रति घनमीटर, जो लागू हो, की दर से शुल्क लिया जा रहा है। झारखंड में भी इसी तरह की ऑनलाइन और शुल्क आधारित व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि, झारखंड में अंतिम शुल्क दर और नियम मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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अवैध खनिज परिवहन पर कसेगा शिकंजा
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, दूसरे राज्यों से झारखंड में आने वाले खनिजों की मात्रा, प्रकार और परिवहन पर निगरानी रखने के लिए फिलहाल कोई प्रभावी केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं है। इससे अंतरराज्यीय खनिज परिवहन की निगरानी में कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। ISTP व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक खनिज वाहन और उसके परिवहन से संबंधित जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा सकेगी। इससे विभाग को यह पता लगाने में आसानी होगी कि कहां से खनिज लाया गया, किस वाहन से लाया गया और किस उद्देश्य से उसका परिवहन किया जा रहा है।

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एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई पर भी रोक
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य केवल अतिरिक्त राजस्व जुटाना नहीं है। इसके जरिए एक ही चालान के आधार पर बार-बार खनिज ढुलाई जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। हर ट्रांजिट पास को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने के कारण जांच के दौरान यह पता लगाना आसान होगा कि किसी चालान का इस्तेमाल पहले किया जा चुका है या नहीं। इससे खनिज परिवहन की निगरानी में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

ऑनलाइन ही जमा होगा ट्रांजिट पास शुल्क
प्रस्तावित व्यवस्था में ISTP के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करने की योजना है। शुल्क जमा होने के बाद ही ट्रांजिट पास जारी किया जाएगा। बिना शुल्क जमा किए या वैध ट्रांजिट पास के बिना झारखंड की सीमा में प्रवेश करने वाले खनिज लदे वाहनों को सीमा पर ही रोकने की व्यवस्था की जा सकती है। सरकार का मानना है कि ऑनलाइन पास, डिजिटल रिकॉर्ड और शुल्क भुगतान की व्यवस्था से अंतरराज्यीय खनिज परिवहन की निगरानी मजबूत होगी। साथ ही, अवैध खनिज परिवहन पर अंकुश लगाने के साथ राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति और इसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक नियमों के आधार पर ही इसकी अंतिम प्रक्रिया, शुल्क दर और लागू होने की तारीख स्पष्ट होगी।

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