JPSC नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, 342 अधिकारियों समेत चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और JPSC से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
11वीं से 13वीं JPSC के 342 चयनित अभ्यर्थियों का मामला
मामले में दो अलग-अलग याचिकाएं दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी की ओर से दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024, को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। इस परीक्षा के माध्यम से 342 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई अभ्यर्थी नियुक्त होकर ट्रेनिंग और सेवा प्रक्रिया में शामिल हो चुके थे। सरकार की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के बाद इन नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया था। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से इन चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है।
दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड आईं सोनम कुमारी
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में बताया कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में नियुक्ति स्वीकार की थी। 24 नवंबर 2025 को उन्हें नियुक्ति पत्र मिला और उन्होंने ट्रेनिंग भी पूरी की। लेकिन इसके बाद 18 अगस्त 2026 को सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में नियुक्ति रद्द कर दी गई। सोनम कुमारी ने अदालत से सरकार के इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। उनका पक्ष है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और सेवा में शामिल होने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके करियर और भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है।
फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति भी हाईकोर्ट के दायरे में
तीसरी याचिका सौरव सिंह एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। इसमें JPSC द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा, विज्ञापन संख्या 18/2023, के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में भी सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाई है। साथ ही राज्य सरकार और JPSC को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
CID जांच के बाद सरकार ने रद्द की थीं परीक्षाएं
दरअसल, JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक जांच का फैसला लिया है। CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी।इसके अलावा सरकार ने 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार कुल 45 परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित और 17 परीक्षाओं को संभावित अनियमितताओं की जांच के दायरे में रखा गया है। सरकार का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, नियुक्त अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी विशेष स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
अब हाईकोर्ट के अगले आदेश पर नजर
हाईकोर्ट की रोक के बाद फिलहाल 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए राहत की स्थिति बनी है। हालांकि, अदालत का यह आदेश अंतरिम प्रकृति का है और अंतिम फैसला अभी बाकी है। अब राज्य सरकार और JPSC को अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद कोर्ट मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगा। इस पूरे मामले में एक तरफ सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और व्यवस्था में सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ नियुक्त अभ्यर्थी अपने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर न्यायिक राहत मांग रहे हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने दोनों पक्षों के बीच चल रही कानूनी लड़ाई को एक महत्वपूर्ण मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजर अगली सुनवाई और राज्य सरकार व JPSC के जवाब पर टिकी है।





