JPSC-JSSC भर्ती में ‘OMR खेल’ का बड़ा खुलासा! 350+ शीट में हेरफेर का आरोप, WhatsApp पर पहुंची Answer Key
रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के सामने ऐसे तथ्य आने की बात कही गई है, जो पूरी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट और ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़ की आशंका सामने आई है। इतना ही नहीं, परीक्षा से जुड़ी गोपनीय Answer Key WhatsApp के जरिए TDPL के एक कर्मचारी तक भेजे जाने का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में है।
मामले में परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL, उसके अधिकारियों-कर्मचारियों और JPSC से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की जांच की बात सामने आई है। हालांकि, ये सभी बातें जांच रिपोर्ट और सामने आए आरोपों पर आधारित हैं। इनकी अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
350 से ज्यादा OMR में कथित हेरफेर!
जांच का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बिंदु FRO और ACF परीक्षा की OMR शीट से जुड़ा है। आरोप है कि Forest Range Officer यानी FRO परीक्षा की 350 से ज्यादा OMR शीट में हेरफेर किया गया। वहीं Assistant Conservator of Forest यानी ACF परीक्षा की 150 से ज्यादा OMR शीट में भी कथित छेड़छाड़ की बात सामने आई है। अगर जांच में यह आरोप प्रमाणित होता है, तो सवाल सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों के चयन का नहीं रहेगा। सवाल यह होगा कि परीक्षा के बाद सुरक्षित रखी जाने वाली OMR शीट तक किसकी पहुंच थी और उसमें बदलाव करने की क्षमता आखिर किसके पास थी?
₹5 लाख से ₹25 लाख तक कथित वसूली
जांच में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर चयन कराने के कथित नेटवर्क की भी बात सामने आई है। आरोप है कि PT में पास कराने के नाम पर ₹5 लाख एडवांस लिए जाते थे, जबकि अंतिम चयन के लिए ₹25 लाख तक की रकम मांगी जाती थी। इसके अलावा मेन्स और इंटरव्यू में पास कराने के लिए कथित तौर पर ₹10 से ₹25 लाख तक की वसूली का दावा किया गया है। मामले में पहले सामने आए आरोपी अभय तिवारी के कथित बयान में भी FRO और ACF पदों के लिए लाखों रुपये की कथित डील का दावा किया गया था।
अभ्यर्थियों से लिए जाते थे दस्तावेज?
कथित सिंडिकेट को लेकर एक और गंभीर दावा सामने आया है। जांच में आरोप है कि अभ्यर्थियों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कैंसिल चेक, हस्ताक्षर किए हुए खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए A4 पेपर तक लिए जाते थे। सवाल यह है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था? क्या यह सिर्फ पैसे की वसूली का तरीका था या अभ्यर्थियों पर दबाव बनाए रखने के लिए कोई अलग व्यवस्था थी? इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
जिस TDPL को JSSC ने ब्लैकलिस्ट किया, उसी को JPSC का काम!
मामले में TDPL की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। दस्तावेजों के मुताबिक TDPL को पहले JSSC में परीक्षा संचालन का काम दिया गया था। लेकिन 20 मई 2025 को JSSC ने गंभीर अनियमितता, लापरवाही और अधिक दर पर भुगतान की मांग जैसे आरोपों के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था।कंपनी को तीन साल तक JSSC की रोजगार प्रक्रिया में शामिल होने से प्रतिबंधित करने की बात भी सामने आई है। लेकिन इसके बाद भी वर्ष 2025 में इसी कंपनी को JPSC की परीक्षाओं का काम End-to-End Basis पर दिए जाने को लेकर CID ने सवाल उठाए हैं। यानी परीक्षा की शुरुआत से लेकर अंतिम प्रक्रिया तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक ही एजेंसी के पास थी।
‘Check and Balance’ नहीं होने पर सवाल
CID की जांच में यह सवाल उठाया गया है कि इतनी संवेदनशील परीक्षा की प्रक्रिया में TDPL के काम पर पर्याप्त Check and Balance था या नहीं। परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी जब एक एजेंसी को End-to-End Basis पर दी गई, तो उसके काम की स्वतंत्र निगरानी कितनी प्रभावी थी—यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
TDPL के परिसर से मिलीं परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं
CID जांच के दौरान TDPL के रांची स्थित आवासीय परिसर से चार कंप्यूटर सेट बरामद किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक कंप्यूटर में FRO Mains 2026 परीक्षा के परीक्षार्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं। मौके पर मौजूद कंपनी कर्मचारी प्रदीप कुमार सिंह ने कथित तौर पर बताया कि यह डेटा कंपनी के कर्मचारियों मो. उस्मान और मो. अवध की ओर से भेजा गया था।अब सवाल यह है कि परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज JPSC कार्यालय से बाहर TDPL के आवासीय परिसर में क्यों रखे गए थे?
WhatsApp पर पहुंची Answer Key!
जांच रिपोर्ट का एक और बेहद संवेदनशील बिंदु Answer Key से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में हुई झारखंड सिविल सेवा PT परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले 26 मई 2026 को Answer Key WhatsApp के जरिए TDPL के कर्मचारी मो. उस्मान को भेजी गई। इस मामले में JPSC की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता से पूछताछ की गई। जांच रिपोर्ट में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है। सवाल सीधा है—एक गोपनीय परीक्षा की Answer Key WhatsApp पर क्यों भेजी गई?
अभय तिवारी का नाम भी जांच के केंद्र में
जांच में अभय कुमार तिवारी का नाम भी सामने आया। TDPL के एक कार्ड में उन्हें कंपनी का Marketing Manager बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और तकनीकी कर्मचारी मो. उस्मान से पूछताछ में अभय तिवारी के कंपनी के कर्मचारियों से संपर्क और शुरुआती दौर में सहयोग की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक अभय तिवारी JSSC और JPSC की कई परीक्षाओं में अभ्यर्थी भी रहे और कई परीक्षाओं में सफल हुए। फिलहाल उनके प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में कार्यरत होने का उल्लेख रिपोर्ट में है। CID ने उनकी भूमिका को लेकर विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता बताई है।
सौरव सुमन की OMR कॉपी ने भी उठाए सवाल
जांच रिपोर्ट में JPSC सिविल सेवा PT के अभ्यर्थी सौरव सुमन की OMR कार्बन कॉपी वायरल होने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल पर वायरल कॉपी को लेकर परीक्षा में सफलता पर सवाल उठाए गए थे। CID ने इस पूरे मामले की गहन जांच की आवश्यकता बताई है।
अब जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क
CID की जांच में TDPL के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह, कर्मचारी मो. उस्मान और मो. अवध, JPSC की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, JPSC कर्मी मनोज तिर्की और सोनू कुमार, अभय कुमार तिवारी समेत अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की जांच की आवश्यकता बताई गई है। रिपोर्ट में गोपनीय दस्तावेजों के बाहर जाने, कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक न्यास भंग और कथित मिलीभगत जैसे पहलुओं पर आगे अनुसंधान की बात कही गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—परीक्षा व्यवस्था कितनी सुरक्षित?
JPSC-JSSC विवाद अब सिर्फ OMR या Answer Key तक सीमित नहीं है। सवाल है—
- अगर OMR में कथित छेड़छाड़ हुई, तो किसने की?
- गोपनीय Answer Key WhatsApp पर किसके निर्देश पर गई?
- जिस कंपनी पर JSSC ने कार्रवाई की, उसे JPSC में काम कैसे मिला?
- End-to-End परीक्षा संचालन में निगरानी व्यवस्था कहां थी?
और सबसे बड़ा सवाल
क्या पैसे के बदले सरकारी नौकरी दिलाने वाला कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था? इन सभी सवालों का अंतिम जवाब CID की जांच, उपलब्ध डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों तथा अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि JPSC-JSSC परीक्षा विवाद ने झारखंड के युवाओं के भरोसे को सबसे बड़ा झटका दिया है। क्योंकि परीक्षा सिर्फ एक OMR शीट नहीं होती…वह लाखों युवाओं के वर्षों की मेहनत, उम्मीद और भविष्य का फैसला होती है।






