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झारखंड हाईकोर्ट से कांके के जमीन कारोबारी कमलेश सिंह को जमानत, 100 कारतूस केस में राहत

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100 कारतूस और 1 करोड़ नकद की बरामदगी

रांची : 21 जून 2024 को कांके अंचल के गोंदा थाने की कार्रवाई में कमलेश कुमार सिंह के कब्जे वाले परिसर से 100 जिंदा कारतूस और 1,02,18,000 रुपये नकद मिले थे। इस बरामदगी के बाद उनके खिलाफ गोंदा पीएस केस संख्या 174/2024 दर्ज हुआ और ईडी ने ECIR/RNZO/14/2024 के तहत धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 में कार्रवाई की।

जमीन घोटाले और फर्जी कागजात के आरोप
ईडी ने आरोप लगाया कि कमलेश सिंह फर्जी नीलामी कागजात बनाकर कांके और आस-पास के मौजा में 85.53 करोड़ रुपये मूल्य की जमीनों पर कब्जा करने में शामिल थे। उन पर सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़, अवैध स्वामित्व तैयार करने और स्थानीय ग्रामीणों को धमका कर जमीन कब्जाने का भी आरोप है। साथ ही गोंदा पीएस केस संख्या 120/2022 में उन पर एक व्यक्ति को जनजातीय भूमि बेचकर 24 लाख रुपये ठगने का आरोप दर्ज है।

ईडी का दावा: कारतूस जमीन कब्जाने में इस्तेमाल
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि बरामद कारतूस और हथियारों का इस्तेमाल ग्रामीणों की जमीन जबरन कब्जाने के लिए किया जाता था। ईडी ने कोर्ट से जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अपने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर 45.85 लाख रुपये की कमाई की है।

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बचाव पक्ष का तर्क: सुरक्षा गार्ड की लाइसेंसी राइफल के कारतूस
कमलेश सिंह के वकील कौशिक सरखेल ने हाईकोर्ट में दलील दी कि 100 कारतूस उनके मुवक्किल के सुरक्षा गार्ड कौशल कुमार सिंह के पास लाइसेंसी राइफल के थे। सुरक्षा गार्ड ने कारतूस जारी करने के लिए कोर्ट में अलग से याचिका भी दायर की है।
वकील ने यह भी कहा कि बरामद नकदी को अपराध की आय मानने के लिए कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं है। कमलेश ने PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में रकम के स्रोत की विस्तृत जानकारी दी है।

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मनी ट्रेल नहीं, आरोप बेबुनियाद
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि जमीन घोटाले में अभियोजन पक्ष का यह मामला नहीं है कि शिकायतकर्ता से कोई पैसा कमलेश को मिला हो। मनी ट्रेल कमलेश तक नहीं पहुंचती। इसलिए उनके खिलाफ आरोप बेबुनियाद हैं।

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ED के विरोध के बावजूद मिली जमानत
प्रवर्तन निदेशालय के रिटेनर काउंसिल अमित कुमार दास ने कमलेश सिंह की जमानत का कड़ा विरोध किया। इसके बावजूद झारखंड हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को आधार बनाकर उन्हें जमानत दे दी।

V Senthil Balaji केस बना मिसाल
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के V Senthil Balaji बनाम ED केस का हवाला दिया। इस फैसले में कहा गया था कि PMLA जैसे सख्त कानून के बावजूद यदि ट्रायल समय पर पूरा होने की संभावना नहीं है, तो आरोपी को अनुच्छेद 21 (शीघ्र सुनवाई का अधिकार) के उल्लंघन के आधार पर जमानत मिल सकती है।

उट्रायल में देरी, चार्जशीट नहीं
कमलेश सिंह 26 जुलाई 2024 से हिरासत में हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि निकट भविष्य में ट्रायल पूरा होने की कोई संभावना नहीं है। प्रेडिकेट ऑफेंस (मूल अपराध) में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। यदि वे इन मामलों में निर्दोष पाये जाते हैं, तो PMLA का केस स्वतः निष्प्रभावी हो जाएगा।

कोर्ट ने कहा – संदेह से प्रतिष्ठा धूमिल नहीं
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने 16 पन्ने के आदेश में कहा कि “सिर्फ संदेह के आधार पर किसी की प्रतिष्ठा धूमिल नहीं की जा सकती”। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी।

इस तरह, 100 कारतूस, 1 करोड़ से अधिक नकद बरामदगी और जमीन घोटाले के गंभीर आरोपों के बावजूद झारखंड हाईकोर्ट ने संवैधानिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट की मिसालों के आधार पर कांके के जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह को जमानत दी। यह फैसला न केवल कानूनी हलकों में चर्चा का विषय है, बल्कि झारखंड में भूमि विवाद और ईडी की कार्रवाई को लेकर भी नई बहस छेड़ रहा है।

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