तीसरे बच्चे पर चुनाव लड़ने की रोक पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- देश बदल गया है
नई दिल्ली: तीसरे बच्चे के आधार पर पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाले कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिस समय जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से ऐसे कानून बनाए गए थे, तब की परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन अब देश की जनसंख्या और प्रजनन दर में बदलाव आया है। ऐसे में इन प्रावधानों की मौजूदा प्रासंगिकता पर विचार किए जाने की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नियम को रद्द नहीं किया है। अदालत केवल इसकी संवैधानिक वैधता और वर्तमान परिस्थितियों में इसकी आवश्यकता पर सुनवाई कर रही है।
महाराष्ट्र के मामले की सुनवाई के दौरान उठे सवाल
यह टिप्पणी महाराष्ट्र के पंचायत कानून से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें तीसरे बच्चे के जन्म के कारण एक निर्वाचित प्रतिनिधि को अयोग्य घोषित किया गया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि पहले के फैसलों और बदलती जनसंख्या स्थिति को देखते हुए इस नीति की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।
‘देश बदल गया है’
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (Fertility Rate) पहले की तुलना में काफी कम हो चुकी है। इसलिए यह देखना होगा कि क्या दो-बच्चे के नियम पर आधारित चुनावी अयोग्यता आज भी उसी उद्देश्य को पूरा करती है, जिसके लिए इसे बनाया गया था।
अभी कानून लागू है
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बावजूद यह नियम जिन राज्यों के कानून में लागू है, वहां अभी भी प्रभावी है। जब तक अदालत अंतिम फैसला नहीं देती या संबंधित राज्य कानून में संशोधन नहीं करता, तब तक मौजूदा प्रावधान लागू रहेंगे।
क्या बदल सकता है आगे?
यदि सुप्रीम कोर्ट भविष्य में इस प्रावधान पर कोई बड़ा फैसला देता है, तो दो-बच्चे के नियम के आधार पर चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े राज्य कानूनों पर व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल मामला विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।




