धनबाद का इंजीनियर म्यांमार में बंधक: 5,000 डॉलर फिरौती देने के बावजूद नहीं हुई रिहाई
मां सरकार से घर वापसी की लगा रहीं आस
इंजीनियर शाहजेब रहमान तीन महीने से लापता, अब उभर रहा ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शक
धनबाद: धनबाद से म्यांमार तक फैले एक चौंकाने वाले मामले ने प्रशासन और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। भूली न्यू आजाद नगर के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर मो. शाहजेब रहमान को म्यांमार में बंधक बना लिया गया है। सबसे भयावह बात यह है कि 5,000 डॉलर फिरौती देने के बाद भी उसे अब तक छोड़ नहीं गया है। उसकी माँ निशांत अफरोज का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब उनकी आखिरी उम्मीद भारत सरकार ही है।
बैंगलुरू की नौकरी से म्यांमार कैसे पहुंचा शाहजेब?
मां निशांत अफरोज बताती हैं कि शाहजेब 2024 में बैंगलुरू गया था, जहां उसे IT सेक्टर में नौकरी मिली थी। छह महीने बाद वह घर वापस लौटा, लेकिन सितंबर में फिर बैंगलुरू गया। कुछ समय बाद उसने बताया कि वह “बैंगलुरू से बाहर” है, लेकिन लोकेशन नहीं बताई।
जनवरी–फरवरी में पहली बार उसने बताया कि वह म्यांमार में काम कर रहा है।
वह टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क में था। शुरुआत में सबकुछ सामान्य लग रहा था—वह नियमित पैसे भी भेजता था।
लेकिन 7–8 अक्टूबर को पहली बार उसने अपनी मां को फोन कर कहा— “मुझे यहां से निकलना है… ये लोग ढाई लाख रुपए मांग रहे हैं।”
गैरकानूनी काम का दबाव, मना करने पर बंधक बनाया गया
टेलीग्राम से भेजे गए एक मैसेज में शाहजेब ने खुलासा किया कि—
- उससे गैरकानूनी ऑनलाइन गतिविधियाँ कराई जा रही थीं
- मना करने पर उसका फोन, लैपटॉप, पासपोर्ट छीन लिया गया
- कमरे में बंद कर उसे धमकाया गया
- फिरौती की रकम पहले ₹2.5 लाख, फिर बढ़ाकर ₹3.6 लाख कर दी गई
इसके बाद उसे कहा गया कि $5,000 (₹4.60 लाख) देने पर ही छोड़ा जाएगा।
घरवालों ने गहने बेचकर, कर्ज लेकर भेजी फिरौती
मां ने सारी जमा-पूंजी, गहने बेचकर और उधार मांगकर पहले $4,000 भेजे। बाद में 7 नवंबर को बचे हुए $1,000 भेजे गए।
कुल रकम — $5,000 (₹4.65 लाख) फिरौती की पूरी राशि देने के बाद शाहजेब ने बताया—
“अब दो–तीन दिन में छोड़ देंगे, पेपरवर्क चल रहा है।” लेकिन दो–तीन दिन बीत गए, फोन बंद हो गया, और फिर कोई संपर्क नहीं हुआ।
डिटेंशन सेंटर पहुंचा शाहजेब—लेकिन क्यों?
रविवार को दूसरे के फोन से शाहजेब ने बताया कि—
- उसे “याताई डिटेंशन सेंटर” में छोड़ दिया गया है
- पासपोर्ट वापस कर दिया गया है
- अब “एम्बेसी के लोग” ही निकाल सकते हैं
उसने यह भी बताया कि उसके साथ नेपाल का एक लड़का भी बंद है, और दोनों को खाने तक की परेशानी हो रही है। शाहजेब ने घरवालों से फिर ₹20,000 भेजने को कहा—यह रकम उसे किसी तरह उपलब्ध कराई गई।
भारत सरकार और एंबेसी कार्रवाई में जुटी: मामला मानव तस्करी का हो सकता है
मां निशांत अफरोज ने—
- इंडियन एंबेसी
- विदेश मंत्रालय
- गृह मंत्रालय
- झारखंड श्रम विभाग
को पत्र लिखकर गुहार लगाई है।
श्रम विभाग के प्रवासी नियंत्रण कक्ष (राज्य) की इंचार्ज शिखा लकड़ा ने पुष्टि की:
“पहली नजर में यह ह्यूमन ट्रैफिकिंग का मामला लगता है। विदेश मंत्रालय और म्यांमार एंबेसी एक्शन में हैं।
पीड़ित को वापस लाने की कोशिश जारी है।”
अब तक एंबेसी से जवाब आ चुका है और रेस्क्यू ऑपरेशन पर काम शुरू हो गया है।
मां का दर्द—“बस मेरा बेटा सही-सलामत घर लौट आए”
निशांत अफरोज लगातार एंबेसी अधिकारियों से बात कर रही हैं। उनकी आवाज में टूटन साफ झलकती है—
“पता नहीं बेटा कैसा होगा… खाना भी ठीक से नहीं मिल रहा। बस सरकार मेरा बच्चा घर ले आए।”
शाहजेब की पढ़ाई बेहतरीन रही है—
- 2014: सिटी मॉडल स्कूल चिरकुंडा से मैट्रिक
- धनबाद राजकीय पॉलिटेक्निक
- भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग
भविष्य संवारने निकला एक युवक म्यांमार के चंगुल में फंस गया।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में फंसे भारतीय युवाओं की बढ़ती संख्या
हाल के महीनों में म्यांमार–लाओस–कंबोडिया रूट से कई भारतीय युवक “आईटी जॉब” या “डिजिटल मार्केटिंग” के नाम पर ट्रैफिकर्स द्वारा झांसा देकर ले जाए जा रहे हैं। एक बार सीमा पार करते ही उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं, और उन्हें
ऑनलाइन फ्रॉड रैकेट चलाने के लिए मजबूर किया जाता है।
शाहजेब का मामला भी उसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
परिवार और सरकार की कोशिश—जो भी हो, उसे वापस लाना प्राथमिकता
फिलहाल राज्य सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय एंबेसी लगातार संपर्क में हैं। मां को उम्मीद है कि सरकार जल्द उनके बेटे को सुरक्षित घर वापस लाएगी।






