चार नौकरियाँ छोड़कर निसार ने पाँचवीं बार हासिल की बड़ी सफलता, साइकिल मिस्त्री पिता की मेहनत रंग लाई

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हिरणपुर (पाकुड़): संघर्ष, जज़्बा और लगातार मेहनत—इन तीन शब्दों में अगर किसी की सफलता को बयां करना हो, तो हिरणपुर प्रखंड के युवा निसार अहमद का नाम सबसे ऊपर आएगा। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले निसार ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए न केवल अपनी राह खुद बनाई, बल्कि पाँचवीं कोशिश में JSSC CGL परीक्षा पास कर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनने का गौरव भी हासिल किया।

हैरानी की बात यह है कि इस सफलता से पहले निसार चार अलग–अलग सरकारी नौकरियाँ छोड़ चुके थे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उनके पिता कुर्बान अंसारी हिरणपुर थाना के सामने वर्षों से साइकिल मिस्त्री की दुकान चलाते हैं। आर्थिक तंगी के बीच पले-बढ़े निसार का बचपन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन सपने बड़े थे।

गरीबी से जूझता परिवार, लेकिन हौसला अडिग
चार भाइयों में मंझले निसार हमेशा मेहनती और पढ़ाई को लेकर गंभीर रहे। बड़े भाई पिता की दुकान संभालते थे, जबकि छोटे भाई पढ़ाई करते रहे। घर की हालत ठीक न होने के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की शिक्षा में कमी नहीं आने दी। यही वजह है कि निसार ने गरीबी को अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया, बल्कि चुनौती मानकर आगे बढ़ते गए।

चार नौकरियाँ छोड़ीं, पाँचवीं में मिली मंज़िल
निसार की नौकरी यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। साल 2019 में उन्होंने लिट्टीपाड़ा प्रखंड कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कुछ महीने कार्य किया। इसी बीच उनकी मेहनत रंग लाई और RBI बटालियन में चयन हुआ। इसके बाद उन्होंने रेलवे की दो परीक्षाएँ पास कीं—पहले D ग्रेड, फिर C ग्रेड, और उड़ीसा में योगदान भी दिया। रेलवे की स्थायी नौकरी करते हुए उन्होंने पंचायत सेवक (सेक्रेटरी) की परीक्षा पास की और लिट्टीपाड़ा में योगदान दिया।

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लेकिन निसार का सपना इन नौकरियों तक सीमित नहीं था। वे हमेशा बड़े मुकाम की तलाश में थे। अंततः दिसंबर 2025 में JSSC CGL परीक्षा में सफलता हासिल कर ली, और अब वे प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनने वाले हैं।

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परिवार में खुशी की लहर
उनके पिता कुर्बान अंसारी भावुक होकर कहते हैं हमने गरीबी देखी है, लेकिन बेटे की पढ़ाई कभी नहीं रोकी। आज उसका संघर्ष रंग लाया। यही हमारे लिए सबसे बड़ी कमाई है। उनकी माँ मीरा देवी गर्व से कहती हैं शुरू में लगा था कि बेटा नौकरी छोड़कर गलती कर रहा है। लेकिन आज उसकी मेहनत ने घर की हालत बदल दी।

निसार का संकल्प—UPSC है अगली मंज़िल
सफलता पाकर भी निसार रुके नहीं हैं। उनका अगला लक्ष्य UPSC है। वे कहते हैं जीवन में गरीबी बहुत देखी है। उसी ने सीखाया कि कभी हार मत मानो। अब लक्ष्य UPSC है, और उसके लिए पूरी मेहनत कर रहा हूँ।

समाज के लिए प्रेरणा
निसार आज हिरणपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पाकुड़ और झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, मन में हौसला हो तो सफलता तय है। उनकी कहानी हर उस युवा को नई उम्मीद देती है जो मुश्किल हालात में भी बड़ा सपना देखने की हिम्मत रखता है।

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