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ASG Eye Hospital ने शुरू की दिवाली पहल — बच्चों में पटाखों से जुड़ी आंख की चोटों के लिए निःशुल्क परामर्श और सर्जरी

ASG Eye Hospital

रांची: दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और उत्सव का प्रतीक है, लेकिन हर साल यह कई परिवारों के लिए चिंता का कारण भी बन जाता है — खासकर तब जब पटाखों से बच्चों की आंखों में गंभीर चोट लग जाती है। इसी सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए एएसजी आई हॉस्पिटल ने एक सराहनीय पहल की है।

अस्पताल ने घोषणा की है कि 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में पटाखों से जुड़ी आंख की चोटों के लिए निःशुल्क परामर्श और आवश्यक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह सेवा 15 अक्टूबर से 24 अक्टूबर 2025 तक देशभर के सभी ASG Eye Hospital ने शुरू की दिवाली पहल — बच्चों में पटाखों से जुड़ी आंख की चोटों के लिए निःशुल्क परामर्श और सर्जरी केंद्रों में लागू रहेगी। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उपचार पूरी तरह निःशुल्क होगा; केवल फार्मेसी, एनेस्थीसिया और ऑप्टिकल सेवाओं के खर्च का वहन मरीज को करना होगा।

सुरक्षित दिवाली के लिए सामाजिक प्रतिबद्धता
ASG Eye Hospital की यह पहल उसके “Only the Best in Vision Care” मिशन का हिस्सा है। अस्पताल ने कहा कि यह अभियान न केवल इलाज तक सीमित है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास भी है ताकि पटाखों से संबंधित नेत्र चोटों को रोका जा सके।

अस्पताल के प्रवक्ता के अनुसार, “दिवाली के दौरान बच्चों में आंख की चोटें एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गई हैं। हमारी कोशिश है कि कोई भी बच्चा आंखों की रोशनी से वंचित न हो और हर घर की दिवाली वास्तव में रोशन हो।”

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पटाखों से होने वाली आंख की चोटें — एक बढ़ती चिंता
2023 के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, भारत में पटाखों से संबंधित आंख की चोटों के 2,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से लगभग 60% मामले 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में पाए गए, जबकि 10% मामलों में स्थायी दृष्टि हानि हुई।

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विशेषज्ञ बताते हैं कि त्योहारों के दौरान आने वाले 20% आपातकालीन नेत्र आघात के मामले पटाखों से संबंधित होते हैं, और इनमें अधिकांश पीड़ित बच्चे या युवा होते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सुरक्षित उत्सव और जन-जागरूकता अब केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गई है।

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ASG Eye Hospital — विश्वस्तरीय नेत्र देखभाल में अग्रणी
भारत का दूसरा सबसे बड़ा और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सुपरस्पेशलिटी आई हॉस्पिटल नेटवर्क, एएसजी आई हॉस्पिटल उन्नत तकनीक और अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम के साथ काम करता है। संस्थान देशभर में आंखों के इलाज, सर्जरी, और सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए जाना जाता है। एएसजी आई हॉस्पिटल लगातार समाज के कमजोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र देखभाल पहुँचाने के लिए विभिन्न CSR (Corporate Social Responsibility) अभियानों का संचालन करता है।

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बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्पताल ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए एएसजी आई हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने कुछ व्यवहारिक और जरूरी सावधानियों की सलाह दी है —

  1. सुरक्षात्मक चश्मा या गॉगल्स पहनकर ही पटाखे जलाएं या उनके पास जाएं, ताकि आंखें धूल, चिंगारी या रासायनिक तत्वों से सुरक्षित रहें।
  2. पटाखे जलाते समय कम से कम 5-6 मीटर की दूरी बनाए रखें और खुले क्षेत्र का चयन करें।
  3. बच्चों को अकेले पटाखे जलाने न दें, उन्हें बड़ों की देखरेख में ही खेलने दें।
  4. घरेलू या अवैध पटाखों से बचें, केवल प्रमाणित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प चुनें।
  5. पटाखे जलाते समय उन्हें हाथ में न पकड़ें, और फूटे या अधजले पटाखों के पास न जाएं।
  6. पटाखों को संभालने के बाद हाथ धोना न भूलें, ताकि रसायन आंखों में न जाएं।
  7. किसी भी चोट की स्थिति में आंखों को रगड़ें, दबाएं या धोएं नहीं — तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  8. नजदीक में हमेशा पानी की बाल्टी या रेत का डिब्बा रखें ताकि आकस्मिक आग को रोका जा सके।

छोटे कदम, बड़ी सुरक्षा
एएसजी आई हॉस्पिटल का मानना है कि “सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।”
पटाखों से दूरी, सुरक्षात्मक उपकरणों का प्रयोग और बच्चों पर निगरानी जैसे सरल उपाय आंखों की अमूल्य रोशनी को सुरक्षित रख सकते हैं।

दिवाली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा और संवेदना का भी प्रतीक है। एएसजी आई हॉस्पिटल की यह पहल समाज में मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी की मिसाल पेश करती है।
बच्चों में दृष्टि सुरक्षा के इस प्रयास से यह संदेश भी जाता है कि उत्सव तभी पूर्ण है जब सभी की आंखों में खुशियों की रोशनी हो।

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