अनुमति खत्म होने के बाद 3 माह तक कैसे चलता रहा क्रेशर? प्रशासन ने विजय तारा इंफ्राटेक को किया सील

Illegal crusher operation

Garhwa: गढ़वा जिला प्रशासन ने विभागीय अनुमति की अवधि समाप्त होने के बावजूद संचालित किए जा रहे एक क्रेशर प्लांट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे अस्थायी रूप से सील कर दिया है। यह कार्रवाई रंका अनुमंडल क्षेत्र के गासेदाग स्थित विजय तारा इंफ्राटेक क्रेशर पर की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले में खनन और क्रेशर उद्योग से जुड़े कई सवाल भी उठने लगे हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभागीय अनुमति समाप्त होने के बाद भी आखिर यह क्रेशर लगभग तीन महीने तक किसके संरक्षण में संचालित होता रहा।

उपायुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार गढ़वा उपायुक्त को सूचना मिली थी कि विजय तारा इंफ्राटेक क्रेशर की विभागीय अनुमति की अवधि समाप्त होने के बावजूद उसका संचालन जारी है। शिकायत और सूचना के आधार पर उपायुक्त ने जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद रंका अनुमंडल पदाधिकारी मोहम्मद परवेज और अंचल पदाधिकारी शिवपूजन तिवारी ने संयुक्त रूप से मंगलवार को गासेदाग स्थित क्रेशर प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्रेशर संचालन की वैध अनुमति 31 मई तक ही थी, लेकिन इसके बावजूद इकाई का संचालन जारी था। प्रशासन ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से क्रेशर को अस्थायी रूप से सील कर दिया और उसके संचालन पर रोक लगा दी।

तीन महीने तक कैसे चलता रहा क्रेशर?
इस कार्रवाई के बाद कई गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि विभागीय अनुमति पहले ही समाप्त हो चुकी थी, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी। यह भी सवाल उठ रहा है कि ऑनलाइन निगरानी और विभागीय रिकॉर्ड उपलब्ध रहने के बावजूद तीन महीने तक क्रेशर का संचालन कैसे जारी रहा। यदि अनुमति समाप्त हो चुकी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इस अवधि में सरकार को संभावित रूप से लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में केवल क्रेशर को सील कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद इकाई को संचालन की अनुमति किस स्तर पर मिली हुई थी।

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प्रशासन ने नियमों के पालन पर दिया जोर
अंचल पदाधिकारी शिवपूजन तिवारी ने बताया कि खनन, क्रेशर और अन्य औद्योगिक इकाइयों के संचालन के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य होती है। अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण कराना संबंधित संचालक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बिना वैध अनुमति के किसी भी औद्योगिक इकाई का संचालन कानून और विभागीय नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में प्रशासन कार्रवाई करने के लिए बाध्य है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिले में संचालित सभी खनन और औद्योगिक इकाइयों की नियमित निगरानी की जा रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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अन्य क्रेशर संचालकों में बढ़ी सतर्कता
विजय तारा इंफ्राटेक क्रेशर पर हुई कार्रवाई के बाद जिले में संचालित अन्य क्रेशर और औद्योगिक इकाइयों के संचालकों के बीच भी हलचल बढ़ गई है। कई संचालक अब अपने लाइसेंस, पर्यावरणीय स्वीकृति और विभागीय अनुमति संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य क्रेशर प्लांटों और औद्योगिक इकाइयों की भी जांच की जाएगी। यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की सराहना
क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों का संचालन निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इससे न केवल सरकारी राजस्व की सुरक्षा होती है बल्कि पर्यावरण और स्थानीय आबादी के हित भी सुरक्षित रहते हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय-समय पर ऐसी कार्रवाई होती रहे तो अवैध संचालन और नियमों की अनदेखी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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क्या होगी आगे की कार्रवाई?
फिलहाल विजय तारा इंफ्राटेक क्रेशर को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई विभागीय जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर तय होगी। प्रशासन यह भी जांच कर सकता है कि अनुमति समाप्त होने के बाद संचालन के दौरान राजस्व, पर्यावरणीय शर्तों और अन्य नियमों का कितना उल्लंघन हुआ। इस मामले ने जिले में प्रशासनिक निगरानी, विभागीय जवाबदेही और अवैध औद्योगिक संचालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष कई महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा उठा सकते हैं।

गढ़वा जिला प्रशासन ने सभी औद्योगिक एवं व्यावसायिक इकाइयों को चेतावनी दी है कि वे अपने लाइसेंस, अनुमति पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर अद्यतन कराएं। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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