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कांग्रेस PAC की बैठक में भिड़े बंधू तिर्की और फुरकान अंसारी, प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में हुई तीखी बहस

बंधू तिर्की VS फुरकान अंसारी बंधू तिर्की VS फुरकान अंसारी

रांची से अमित की रिपोर्ट : झारखंड कांग्रेस में अंतर्कलह अब किसी से छुपी नहीं रह गई है। पार्टी के बड़े नेता अब एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं और यह नाराजगी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैचारिक स्तर तक पहुंच गई है। गुरुवार को रांची में कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक में जो हुआ, उसने पार्टी में मौजूद गुटबाजी को और भी अधिक उजागर कर दिया है ।

PAC बैठक में पूर्व सांसद फुरकान अंसारी और पूर्व मंत्री तथा वर्तमान में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधू तिर्की के बीच तीखी बहस हुई। मामला पेसा कानून और रिम्स-2 के प्रस्तावित जमीन से जुड़ा था, लेकिन यह टकराव कहीं अधिक गहराई लिए हुए दिखा।

बैठक में प्रदेश प्रभारी के राजू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद थे, लेकिन दोनों ने इस टकराव के दौरान चुप्पी साधे रखी। बंधू तिर्की ने पेसा कानून को लेकर कहा कि पार्टी में ही कुछ जयचंद हैं, जो कानून को लागू करने में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे क्षेत्र में कांग्रेस की छवि खराब हो रही है।

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बंधू की इस बात पर पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि “अभी आप कांग्रेस में नये-नये आए हैं, थोड़ा धैर्य रखें।” उन्होंने बंधू तिर्की पर परोक्ष रूप से आरोप लगाया कि वे रिम्स टू के प्रस्तावित निर्माण का विरोध कर रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है और विपक्षी इसे मुद्दा बना रहे हैं।

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इस दौरान PAC सदस्य अनादि ब्रह्रा ने कहा कि पेसा कानून लागू करने से सवर्णों में नाराजगी बढ़ेगी। चर्चा के बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने वरिष्ठ नेता ददई दुबे के निधन की सूचना देकर बैठक को समाप्त करने की कोशिश की, ताकि यह टकराव और आगे न बढ़े।

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इस बहस के राजनीतिक मायने भी गंभीर हैं क्योंकि बंधू तिर्की और फुरकान अंसारी दोनों के बेटे राज्य सरकार में मंत्री हैं—बंधू की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की कृषि मंत्री हैं जबकि फुरकान अंसारी के बेटे इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री हैं। रिम्स टू के निर्माण को लेकर इरफान अंसारी पहले ही बंधू के बयानों पर आपत्ति जता चुके हैं। अब यह टकराव दोनों वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच चुका है।

बता दें कि बंधू तिर्की 2019 में बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम से विधायक चुने गए थे, लेकिन मरांडी द्वारा पार्टी का बीजेपी में विलय किए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उनके साथ प्रदीप यादव भी कांग्रेस में आए थे, जो अब कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। बंधू तिर्की को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली लेकिन पुराने कांग्रेसी नेताओं के साथ उनका तालमेल अभी तक पूरी तरह से नहीं बैठ पाया है।

PAC की बैठक से पहले कांग्रेस विधायकों की बैठक में भी असंतोष का माहौल देखने को मिला। कई विधायकों ने पार्टी कोटे के चार मंत्रियों पर नाराजगी जताई और कहा कि वे पार्टी एजेंडे के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। विधायकों ने कहा कि मंत्री को कहने के बावजूद उनके क्षेत्र के कार्य नहीं हो रहे, जिससे जनता को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के विधायक और मंत्री आमने-सामने आए हैं। पिछली सरकार में भी बन्ना गुप्ता और बादल पत्रलेख को लेकर कई बार विधायक असंतोष जता चुके हैं। मंत्री बदले लेकिन व्यवहार और तालमेल की कमी अब भी जस की तस बनी हुई है।

इस घटनाक्रम ने झारखंड कांग्रेस के अंदर की असल स्थिति को सामने ला दिया है। जहां एक ओर पार्टी के पुराने और नए नेताओं में तालमेल की कमी है, वहीं दूसरी ओर मंत्री और विधायक एक दूसरे से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में आगामी चुनाव से पहले पार्टी को इस अंदरूनी कलह को सुलझाना ही होगा, नहीं तो आने वाला समय कांग्रेस के लिए और मुश्किल भरा हो सकता है।

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