गुमला की बेटियों ने रचा इतिहास, सुब्रतो कप में झारखंड बना राष्ट्रीय चैंपियन

Gumla girls Subroto Cup champions

कोच बीना केरकेट्टा की रणनीति और खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से झारखंड के नाम प्रतिष्ठित ट्रॉफी

मिजोरम की NCC टीम को फाइनल में 2-0 से हराया

नई दिल्ली/गुमला: झारखंड की बेटियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दिल्ली के ऐतिहासिक डॉ. बी.आर. आंबेडकर स्टेडियम में खेले गए 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप के अंडर-17 बालिका वर्ग के फाइनल में संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मिजोरम की NCC टीम को 2-0 से हरा दिया। इस जीत के साथ गुमला की बेटियों ने झारखंड को राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब दिला दिया। फाइनल मुकाबले में झारखंड की टीम ने शुरुआत से ही अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। खिलाड़ियों ने आक्रमण के साथ-साथ डिफेंस में भी शानदार तालमेल दिखाया और मिजोरम की टीम को पूरे मुकाबले में वापसी का मौका नहीं दिया। निर्णायक जीत के साथ ही गुमला की बेटियों ने सुब्रतो कप की प्रतिष्ठित ट्रॉफी अपने नाम कर इतिहास रच दिया।

कोच बीना केरकेट्टा की रणनीति ने दिलाई जीत
झारखंड की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत के साथ-साथ कोच एवं प्रशिक्षक बीना केरकेट्टा की रणनीति भी अहम रही। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले के लिए उन्होंने टीम की कमजोरियों और ताकत को ध्यान में रखते हुए रक्षा, मिडफील्ड और आक्रमण के बीच बेहतरीन संतुलन तैयार किया। मैच के दौरान झारखंड की खिलाड़ियों ने लगातार विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा। वहीं, रक्षापंक्ति को भी मजबूत रखा गया, ताकि मिजोरम की टीम को काउंटर अटैक का मौका न मिले। मैदान पर खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी भूमिका को बखूबी निभाया और टीम को ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया।

कप्तान बीना कुमारी ने संभाली कमान
फाइनल में कप्तान बीना कुमारी ने टीम का शानदार नेतृत्व किया। उन्होंने खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहित किया और दबाव के बीच टीम को संयमित एवं एकजुट बनाए रखा। राष्ट्रीय स्तर के फाइनल में खेलने का दबाव होने के बावजूद गुमला की खिलाड़ियों ने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया। कप्तान के नेतृत्व में पूरी टीम ने एकजुट होकर मुकाबला खेला और मिजोरम की टीम को लगातार चुनौती देती रही।

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गोलकीपर खुशबू बनीं मजबूत दीवार
झारखंड की जीत में डिफेंस और गोलकीपिंग की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। गोलकीपर खुशबू कुमारी ने गोलपोस्ट के सामने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मिजोरम की ओर से किए गए प्रयासों को नाकाम किया और टीम को क्लीन शीट के साथ मुकाबला खत्म करने में मदद की। वहीं, मनीषा डुंगडुंग ने डिफेंस में मजबूती दिखाई। उन्होंने विपक्षी टीम के हमलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी रक्षापंक्ति को लगातार मजबूत बनाए रखा।

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ऊषा कुमारी ने बढ़ाया आक्रमण का दबाव
झारखंड के आक्रमण को धार देने में ऊषा कुमारी की भूमिका भी अहम रही। उनकी तेजी और प्रभावी मूवमेंट ने मिजोरम की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाए रखा। फाइनल में झारखंड की टीम ने केवल आक्रमण पर निर्भर रहने के बजाय डिफेंस और अटैक के बीच शानदार संतुलन कायम रखा। यही रणनीति टीम की जीत की बड़ी वजह बनी।

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2-0 की जीत के साथ झारखंड का परचम
डॉ. बी.आर. आंबेडकर स्टेडियम में मुकाबला आगे बढ़ने के साथ झारखंड की बेटियों का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। मिजोरम की NCC टीम ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन झारखंड की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन के सामने उसके प्रयास सफल नहीं हो सके। आखिरकार स्कोरबोर्ड पर झारखंड 2-0 मिजोरम रहा और इसी के साथ संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की बेटियों ने राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह जीत गुमला और पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। गुमला की बेटियों ने साबित कर दिया कि सही प्रशिक्षण, अनुशासन, रणनीति और मेहनत के दम पर ग्रामीण और छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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