मतदाताओं को बड़ी राहत! SIR पूरी कर चुके राज्यों में Form-6 से हटी अतिरिक्त घोषणा
ECI ने SIR पूरी कर चुके राज्यों में नए मतदाताओं के लिए सामान्य Form-6 बहाल किया
झारखंड में SIR प्रक्रिया अभी जारी है
Ranchi : विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निर्वाचन आयोग ने Form-6 की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन Form-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी है, जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं को अब सामान्य वैधानिक Form-6 के जरिए आवेदन करना होगा। हालांकि झारखंड के मतदाताओं के लिए यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है, क्योंकि राज्य में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है। ECI के कार्यक्रम के मुताबिक झारखंड में 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है।
Form-6 से क्या हटाया गया?
SIR के दौरान नए मतदाताओं के लिए Form-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी जाती थी कि वह स्वयं या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी किसी पुराने गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं। अब जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा Form-6 से हटा दी गई है। इसके बाद नए मतदाताओं के लिए सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया लागू होगी।
अब सामान्य Form-6 से होगा आवेदन
निर्वाचन आयोग के मुताबिक SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा पुनरीक्षण प्रक्रिया की विशेष आवश्यकता थी। SIR समाप्त होने के बाद गैर-SIR अवधि में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी SIR पूरी कर चुके राज्यों में नए मतदाताओं को सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की सुविधा मिलेगी।
ECINET और CEO पोर्टल से भी हटा विकल्प
यह बदलाव केवल Form-6 तक सीमित नहीं है। SIR पूरी कर चुके राज्यों में ECINET ऐप और पोर्टल के साथ संबंधित राज्यों के Chief Electoral Officer यानी CEO पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है। वहीं जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभी चल रहा है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई है।
झारखंड में अभी क्या स्थिति है?
झारखंड में SIR को लेकर 30 सितंबर 2026 महत्वपूर्ण तारीख है। ECI के कार्यक्रम के अनुसार राज्य में ड्राफ्ट मतदाता सूची 5 अगस्त को प्रकाशित की गई थी और दावे एवं आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर तक रखी गई है। इसके बाद दावों और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि झारखंड में भी Form-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है। फिलहाल राज्य SIR प्रक्रिया के चरण में है।
26 सितंबर की बैठक के बाद बदलाव
Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटाने का फैसला 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक आयोग ने SIR पूरी कर चुके राज्यों में ECINET की व्यवस्था को सामान्य Form-6 प्रक्रिया के अनुरूप कर दिया है।
Form-6 को लेकर आयोग के भीतर भी उठे थे सवाल
SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने Form-6 में अतिरिक्त घोषणा जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर आयोग के भीतर असहमति सामने आई थी। हालांकि 26 सितंबर को आयोग ने अपने सार्वजनिक स्पष्टीकरण में कहा था कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया गया संदर्भ
निर्वाचन आयोग ने SIR की अतिरिक्त घोषणा के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में बिहार SIR मामले की कार्यवाही का भी हवाला दिया था। आयोग का कहना था कि SIR के दौरान अतिरिक्त घोषणा की आवश्यकता इसी प्रक्रिया से जुड़ी थी। अब SIR पूरी कर चुके राज्यों में इसे हटाने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण और SIR के दौरान लागू विशेष प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट हो गया है।
झारखंड के मतदाताओं के लिए क्या मतलब?
झारखंड के नए मतदाताओं के लिए फिलहाल SIR प्रक्रिया जारी है। 30 सितंबर दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख है और 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है। इसलिए Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटने वाला बदलाव झारखंड में SIR पूरा होने के बाद ही लागू होने की स्थिति बनेगी। यानी फिलहाल झारखंड के मतदाताओं के लिए सबसे अहम तारीख 30 सितंबर नहीं, बल्कि 7 अक्टूबर को आने वाली अंतिम मतदाता सूची है। इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से राज्य में सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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