JPSC Scam: चौथे दिन भी पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते से 7 घंटे पूछताछ, जांच में जुटी CID
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच तेज, अब तक 11 गिरफ्तार; दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की हो रही पड़ताल
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में CID ने सोमवार (3 अगस्त) को आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से लगातार चौथी बार पूछताछ की। इस बार करीब सात घंटे तक चली पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने परीक्षा संचालन, एजेंसी चयन, परिणाम प्रकाशन और दस्तावेजों से जुड़े कई बिंदुओं पर उनसे जवाब मांगे। पूछताछ समाप्त होने के बाद एल. खियांग्ते CID मुख्यालय से अपने घर के लिए रवाना हो गए। इससे पहले CID 28 जुलाई, 29 जुलाई और 31 जुलाई को भी उनसे लंबी पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है ताकि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
जांच शुरू होते ही दिया था इस्तीफा
14वीं JPSC पीटी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद एल. खियांग्ते ने आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनसे इस्तीफा मांगा था, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ दिया। एल. खियांग्ते पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में परीक्षा संचालन से लेकर परिणाम जारी करने तक कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुईं। आरोपों के अनुसार उन्होंने आयोग के अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना ही प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया। इसके अलावा परीक्षा संचालन का जिम्मा एक कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी को सौंपने के आरोप भी उन पर लगाए गए हैं।
OMR शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि परीक्षा से करीब छह महीने पहले संदिग्ध OMR शीट से जुड़ी शिकायत आयोग तक पहुंची थी, लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। CID इस पहलू की भी जांच कर रही है कि शिकायत मिलने के बावजूद आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने भी कथित तौर पर पूर्व अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। एजेंसी अब दोनों के बयानों का मिलान दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के साथ कर रही है।
सभी आरोपों से इनकार कर रहे हैं एल. खियांग्ते
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 के अनुसार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में किसी भी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा संचालन का जिम्मा नहीं दिया गया। उनका दावा है कि उन्होंने आयोग में प्रशासनिक सुधार लाने के उद्देश्य से काम किया और सभी निर्णय निर्धारित नियमों के तहत लिए गए। एल. खियांग्ते का कहना है कि JPSC का अध्यक्ष पद संभालते समय वे आयोग की चुनौतियों से पूरी तरह परिचित थे और उन्होंने व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया।
11 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में CID अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL के निदेशक, कंपनी के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज सहित अन्य लोग शामिल हैं। इसके अलावा, 14वीं JPSC पीटी परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थी सौरभ सुमन को भी जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ की जा चुकी है और उनके बयानों के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
जांच के अगले चरण पर टिकी निगाहें
CID का कहना है कि दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारियों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित अनियमितताएं किस स्तर तक हुईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किन अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।






