झारखंड में जमीन और फ्लैट खरीदना होगा महंगा, रजिस्ट्री पर नया सरचार्ज लागू; जानिए कितना बढ़ेगा खर्च
रांची: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अब रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। राज्य सरकार ने ‘झारखंड नगरपालिका भूमि एवं भवन स्थानांतरण अधिभार नियमावली-2026’ लागू कर दी है। इसके तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले खरीदारों को अब निबंधन शुल्क पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार (सर्चार्ज) देना होगा। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त राशि का उपयोग शहरी निकायों को मजबूत करने और शहरों की आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
क्या बदला है?
अब तक शहरी क्षेत्रों में संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान खरीदार को संपत्ति के मूल्य या सरकार द्वारा निर्धारित सर्किल रेट, जो भी अधिक हो, उसके आधार पर शुल्क देना होता था। वर्तमान व्यवस्था में सामान्यतः—
- 4% स्टांप शुल्क
- 3% निबंधन शुल्कदेना पड़ता है।
नई नियमावली के तहत अब निबंधन शुल्क पर 10% अतिरिक्त अधिभार भी लगाया जाएगा। यानी स्टांप शुल्क की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन रजिस्ट्री के समय देय निबंधन शुल्क पर अतिरिक्त राशि देनी होगी।
50 लाख की संपत्ति पर कितना पड़ेगा असर?
यदि कोई व्यक्ति 50 लाख रुपये की संपत्ति खरीदता है, तो सामान्य गणना के अनुसार
- स्टांप शुल्क (4%) = ₹2,00,000,
- निबंधन शुल्क (3%) = ₹1,50,000
- कुल = ₹3,50,000
नई व्यवस्था के तहत निबंधन शुल्क ₹1.50 लाख पर 10% अधिभार लगाया जाएगा। यानी अतिरिक्त राशि होगी—₹15,000 ऐसे में कुल रजिस्ट्री खर्च लगभग ₹3,65,000 हो जाएगा।
सरकार ने क्यों लागू किया नया नियम?
राज्य सरकार का कहना है कि इस अधिभार से मिलने वाली राशि संबंधित नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस धन का उपयोग किया जाएगा—सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का विकास, शहरी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार जैसी विकास योजनाओं में। सरकार का दावा है कि इससे शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
रियल एस्टेट सेक्टर ने जताई चिंता
नई नियमावली को लेकर रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पहले से ही स्टांप शुल्क, निबंधन शुल्क और अन्य खर्चों के कारण संपत्ति खरीदना महंगा है। ऐसे में अतिरिक्त अधिभार लागू होने से खरीदारों, विशेषकर मध्यम वर्ग, पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कुछ समय के लिए संपत्ति खरीदने की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि यह फैसला केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार के अनुसार, नगर निकायों को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलने से शहरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।






