गढ़वा में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ का आरोप, 269 प्री-फिल्ड Form-7 मिलने से मचा हड़कंप; JMM ने जांच की मांग की

Garhwa Voter List News

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले में मतदाता सूची को लेकर गंभीर मामला सामने आने का दावा किया गया है। रंका प्रखंड में 269 ऐसे Form-7 मिलने का आरोप है, जो कंप्यूटर से पहले से भरे हुए थे और उन पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर नहीं थे। इस मामले को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनधिकृत हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर के कल्याणपुर स्थित आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में JMM नेताओं ने मामले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं के मुताबिक, बरामद फॉर्म में मतदाताओं की जानकारी पहले से दर्ज थी और उन्हें कथित तौर पर BLO के पास हस्ताक्षर कराने के लिए ले जाया जा रहा था।

दुकान से 269 Form-7 मिलने का दावा
JMM नेताओं के अनुसार, रंका प्रखंड क्षेत्र की एक दुकान से 269 पूर्व-भरे हुए Form-7 बरामद किए गए। पार्टी का आरोप है कि इन फॉर्मों में संबंधित मतदाताओं के नाम और अन्य विवरण पहले से दर्ज थे, जबकि फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। JMM के मुताबिक, इन फॉर्मों को BLO के पास हस्ताक्षर कराने के लिए ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों को जब इसमें गड़बड़ी की आशंका हुई तो उन्होंने संबंधित व्यक्ति को पकड़कर प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन उसे हिरासत में लेकर थाने ले गई। हालांकि, मामले में पुलिस या निर्वाचन विभाग की ओर से जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। इसलिए फॉर्म की वास्तविक प्रकृति और इनके इस्तेमाल के उद्देश्य की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

भाजपा कार्यकर्ता से जुड़े होने का JMM का आरोप
JMM नेताओं ने दावा किया कि ये फॉर्म भाजपा कार्यकर्ता शिव प्रसाद सोनी के पास पाए गए। पार्टी ने इस आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा JMM ने आरोप लगाया कि खपरो पंचायत के बूथ संख्या 382 और 407 से संबंधित मतदाता सूची और SIR से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी की प्रचार सामग्री वाले झोले में पाए गए। पार्टी ने सवाल उठाया कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचे।

अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप
JMM केंद्रीय सदस्य जवाहर पासवान ने आरोप लगाया कि विशेष रूप से अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़े और दलित बहुल इलाकों के पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का कथित प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने पूर्व में असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में सामने आए चुनावी विवादों का भी उल्लेख किया। हालांकि, मतदाताओं को लक्षित कर नाम हटाने के संगठित प्रयास संबंधी आरोप फिलहाल JMM की ओर से लगाए गए हैं, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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SIR के गोपनीय दस्तावेजों को लेकर सवाल
जवाहर पासवान ने यह भी सवाल उठाया कि SIR से संबंधित सरकारी दस्तावेज किसी राजनीतिक दल या उसके कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचे।उन्होंने मांग की कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक केवल संदिग्ध या पहले से भरे हुए Form-7 के आधार पर किसी वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले संबंधित मतदाता को नियमानुसार सूचना दी जानी चाहिए।

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JMM ने रखीं ये प्रमुख मांगें
JMM जिला सचिव शरीफ अंसारी ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कई सुझाव रखे। पार्टी की प्रमुख मांगें हैं—

  • रंका प्रखंड की खपरो पंचायत के बूथ संख्या 382 और 407 से जुड़े पूर्व-भरे Form-7 के स्रोत की जांच हो।
  • इन फॉर्मों को तैयार कराने वाले लोगों की पहचान की जाए।
  • Form-7 के आधार पर प्राप्त सभी आपत्तियों और संबंधित प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।
  • किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे विधिसम्मत सूचना दी जाए।
  • मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
  • जांच में किसी राजनीतिक दल, पदाधिकारी या कार्यकर्ता की संलिप्तता सामने आने पर निर्वाचन कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

अंतिम जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
रंका प्रखंड में 269 Form-7 मिलने और SIR से जुड़े दस्तावेजों को लेकर JMM ने जिस तरह के आरोप लगाए हैं, उससे जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब इस पूरे मामले में प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद Form-7 किसने तैयार किए, उनका उद्देश्य क्या था और क्या उनका इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी तरह के बदलाव के लिए किया जाना था। जांच पूरी होने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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