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साहिबगंज अवैध पत्थर खनन केस में CBI का शिकंजा तेज, अफसरों पर भी कार्रवाई की तैयारी

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साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में करीब 1250 करोड़ रुपये के अवैध पत्थर खनन और परिवहन से जुड़े चर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। एजेंसी अब केवल पत्थर माफिया ही नहीं, बल्कि कथित रूप से शामिल अफसरों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई दस्तावेजों को क्रमबद्ध करते हुए जल्द ही अदालत में पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दस्तावेज और बयान को व्यवस्थित कर रही CBI
सीबीआई की टीम पिछले अभियानों में बरामद दस्तावेजों और आरोपितों के बयानों को व्यवस्थित करने में जुटी है। एजेंसी का प्रयास है कि अदालत में ऐसा मजबूत केस पेश किया जाए जिससे आरोपितों के पास बचाव के सीमित विकल्प ही बचें। जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पूर्व में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई और उससे जुड़े तथ्य भी सीबीआई को जांच की दिशा तय करने में मदद कर रहे हैं।

जांच अधिकारियों का मानना है कि ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से मिले इनपुट के आधार पर अब सीबीआई कई नए एंगल पर काम कर रही है। इससे केस की गति तेज हुई है और आगे की कार्रवाई के लिए ठोस आधार तैयार हो रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच में आई तेजी
दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ—जस्टिस आलोक राठे और जस्टिस संजय कुमार—ने साहिबगंज के नींबू पहाड़ अवैध पत्थर खनन मामले में सीबीआई को स्वतंत्र रूप से जांच करने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को सौंपी गई जांच जिम्मेदारी उचित है और एजेंसी को गंभीरता से पूरे मामले की पड़ताल करनी चाहिए।

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सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद से ही सीबीआई लगातार साहिबगंज में कैंप कर रही है। बीते दो वर्षों के दौरान एजेंसी ने कई चरणों में छापेमारी अभियान चलाया और बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, गहने, कारतूस और शेल कंपनियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद किए।

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छापेमारी में मिली थी बड़ी बरामदगी
सीबीआई की पिछली कार्रवाई के दौरान करीब 60 लाख रुपये नकद, एक किलोग्राम सोना, 1.2 किलोग्राम सोना-चांदी के गहने, 61 कारतूस और चल-अचल संपत्ति से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे। इसके अलावा कथित शेल कंपनियों में निवेश से संबंधित कागजात भी एजेंसी के हाथ लगे थे, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि अवैध खनन के जरिए अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इसी कड़ी में कई लोगों से पूछताछ भी की गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद नवंबर 2023 में सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से एजेंसी लगातार नींबू पहाड़ क्षेत्र में जांच कर रही है। यह पूरा मामला साहिबगंज के नींबू पहाड़ में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और परिवहन से जुड़ा हुआ है, जिसकी मनी लॉन्ड्रिंग जांच पहले से ईडी कर रही है।

मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा था जब इस केस के अहम गवाह विजय हांसदा अपनी गवाही से मुकर गए थे। इसके बाद अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी थी।

जनवरी 2026 में भी जारी रहा जांच अभियान
सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जनवरी 2026 में भी सीबीआई की टीम साहिबगंज में लगातार कैंप करती रही। एजेंसी ने नींबू पहाड़ पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया और अवैध खनन के संभावित स्थानों का जायजा लिया। इसके अलावा जिला खनन कार्यालय में भी छानबीन की गई और कई अधिकारियों व स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई।

सीबीआई की टीम मिर्जा चौकी और कोटालपोखर इलाके में भी पहुंची थी। वहीं ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग केस में जब्त किए गए जहाज का भी निरीक्षण किया गया, जिससे अवैध पत्थर परिवहन की कड़ियों को समझने में मदद मिल सके।

जल्द अदालत में दाखिल हो सकती है चार्जशीट
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी अब जांच के अंतिम चरण में है और सबूतों को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में सीबीआई अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इस कार्रवाई को झारखंड के सबसे बड़े अवैध खनन मामलों में से एक माना जा रहा है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस केस को लेकर हलचल तेज है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सीबीआई की चार्जशीट में किन-किन नामों का खुलासा होता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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