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Budget History: दुनिया में पहली बार किस देश ने पेश किया था बजट?

Budget History

मुनादी Live डेस्क: हर साल जब बजट पेश होता है, तो देशभर की नजरें संसद और वित्त मंत्री के भाषण पर टिक जाती हैं। टैक्स, महंगाई, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य—सब कुछ बजट से जुड़ा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजट की शुरुआत कहां से हुई, या “बजट” शब्द आखिर आया कहां से? आज Munadi Live पर हम आपको बजट के इतिहास से जुड़ी एक रोचक और ज्ञानवर्धक कहानी बता रहे हैं।

बजट शब्द की उत्पत्ति: थैले से संसद तक का सफर
“बजट” शब्द सुनते ही आज हमारे दिमाग में आय-व्यय का पूरा खाका आ जाता है, लेकिन इसकी जड़ें बहुत पुरानी हैं। बजट शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘Bulga’ से मानी जाती है, जिसका अर्थ होता है थैला या चमड़े का पाउच। यही शब्द आगे चलकर फ्रेंच भाषा में ‘Bougette’ बना, जिसका अर्थ था छोटा थैला।

इंग्लैंड पहुंचने पर यह ‘Bogette’ कहलाया और समय के साथ इसका आधुनिक रूप ‘Budget’ बन गया। पुराने समय में वित्त मंत्री अपने खर्च और कर प्रस्ताव एक चमड़े के थैले में लेकर संसद पहुंचते थे। इसी “थैले” से धीरे-धीरे “बजट” शब्द का जन्म हुआ।

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दुनिया में सबसे पहले किस देश ने पेश किया बजट?

  • बजट पेश करने की परंपरा की शुरुआत इंग्लैंड से हुई।
  • 1760 में इंग्लैंड ने दुनिया का पहला राष्ट्रीय बजट पेश किया।
  • उस दौर में बजट का उद्देश्य सरकार के खर्चों और करों की जानकारी संसद के सामने रखना था।
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इसके बाद अन्य देशों ने भी इस प्रणाली को अपनाया—

  • फ्रांस: 1817
  • अमेरिका: 1921
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आज दुनिया के लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में बजट सरकार की आर्थिक नीतियों का सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है।

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भारत में बजट की शुरुआत कब हुई?
भारत में बजट की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी।

ब्रिटिश भारत का पहला बजट
1857 के विद्रोह के बाद भारत की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई थी। इसे सुधारने के लिए ब्रिटिश सरकार ने जेम्स विल्सन को भारत बुलाया। 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने भारत का पहला केंद्रीय बजट पेश किया। इस बजट का उद्देश्य कर व्यवस्था को संगठित करना और प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण पाना था।

आजाद भारत का पहला बजट
भारत की आज़ादी के बाद—26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. षणमुगम चेट्टी ने स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया।यह बजट नए राष्ट्र की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज बना।

बजट क्यों है लोकतंत्र की रीढ़?
बजट सिर्फ आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होता। यह—

  • सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाता है
  • गरीब, किसान, युवा, महिला और मध्यम वर्ग के लिए योजनाओं की दिशा तय करता है
  • देश की आर्थिक सेहत का आईना होता है

इसीलिए बजट को लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज माना जाता है।

थैले से राष्ट्र की तक़दीर तक
एक साधारण चमड़े के थैले से शुरू हुआ “बजट” आज देशों की आर्थिक दिशा तय करता है। इंग्लैंड से शुरू हुई यह परंपरा भारत तक पहुंची और आज हर साल करोड़ों लोगों की उम्मीदें इससे जुड़ी होती हैं।

बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भविष्य की रूपरेखा है।

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