गुमला कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई गई फांसी की सजा

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गुमला: झारखंड के गुमला जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ की एक अदालत ने मानवता को शर्मसार करने वाले आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश-4 (पोक्सो) संजीव भाटिया की अदालत ने 13 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले दोषी संजय विश्वकर्मा (49) को फांसी की सजा का ऐलान किया है।

झाड़-फूंक के नाम पर किया घिनौना कृत्य
मामला गुमला के भरनो ब्लॉक का है। दोषी संजय विश्वकर्मा (पिता: नथुनी विश्वकर्मा), जो मूल रूप से हजारीबाग के इचाक थाना क्षेत्र का निवासी है, ने मासूम बच्ची की दिव्यांगता का फायदा उठाया। उसने बच्ची के माता-पिता को झांसे में लिया कि पूजा-पाठ के जरिए उनकी बेटी की दिव्यांगता ठीक हो जाएगी।

पूजा के बहाने कमरे में करता था यौन शोषण
दोषी ने परिजनों को विश्वास दिलाया कि इलाज के लिए रात भर पूजा-पाठ करना होगा। इसी बहाने वह मासूम बच्ची को रात भर एक कमरे में रखता था और उसके साथ हैवानियत करता था। यह सिलसिला कई दिनों तक चला, जिसके परिणामस्वरूप 13 साल की मासूम गर्भवती हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पीड़िता का गर्भपात कराना पड़ा।

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कानूनी कार्रवाई: घटना के बाद पीड़िता के पिता ने भरनो थाना में (कांड संख्या 50/22) प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और साक्ष्य जुटाए।

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अदालत ने सख्त लहजे में सुनाया फैसला
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता और अपराध की क्रूरता को देखते हुए संजय विश्वकर्मा को दोषी करार दिया। सोमवार को पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपराधी को फांसी की सजा मुकर्रर की।

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इस फैसले को समाज में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।

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