मां छिन्नमस्तिका मंदिर के 102 करोड़ के DPR पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों से मांगा कार्रवाई का ब्योरा

Maa Chinnamastika Temple

Ramgarh News: झारखंड हाईकोर्ट में रजरप्पा स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों से मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और विकास के लिए तैयार किए गए 102 करोड़ रुपये के डीपीआर पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने इस संबंध में विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

102 करोड़ रुपये के डीपीआर पर कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और सुंदरीकरण के लिए डीपीआर तैयार किए जाने के बाद उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि डीपीआर के बाद हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल की जाए। अगली सुनवाई में सरकार को मामले की प्रगति से कोर्ट को अवगत कराना होगा।

मंदिर परिसर के विकास में क्या-क्या प्रस्तावित है?
मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के पुनरुद्धार और विकास के लिए करीब 102 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है। इसमें मंदिर परिसर के सुंदरीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कई कार्य प्रस्तावित हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसी डीपीआर के आधार पर आगे बढ़ी प्रक्रिया और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की स्थिति जाननी चाही।

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बजट अधिक होने के कारण विभागीय स्तर पर प्रक्रिया
इससे पहले सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि मंदिर परिसर के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्रस्ताव में बजट की राशि काफी अधिक है। अधिकारियों के अनुसार प्रस्ताव को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है और संबंधित फाइल विभागीय मंत्री के पास भेजी गई है। मंत्री स्तर से स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट
सुनवाई के दौरान अधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी। हालांकि, अगली सुनवाई में अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट की कार्यवाही में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। इस सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्र और डीपीआर पर हुई कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

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अवमानना याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला प्रार्थी संजीव कुमार सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका से जुड़ा है। प्रार्थी ने पूर्व में हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश का अनुपालन कराने की मांग की है। प्रार्थी का कहना है कि मंदिर परिसर के विकास, सुंदरीकरण और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।

विस्थापित दुकानदारों की ओर से भी रखा गया पक्ष
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा। वहीं मंदिर परिसर में मौजूद विस्थापित दुकानदारों की ओर से अधिवक्ता राधा कृष्ण गुप्ता और अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की। दुकानदारों से जुड़े मुद्दों को भी सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष रखा गया।

13 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजर
रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर परिसर के विकास और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़ा यह मामला लंबे समय से चर्चा में है। अब 13 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र और करीब 102 करोड़ रुपये के डीपीआर पर हुई कार्रवाई की स्थिति सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद मंदिर परिसर के प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर आगे की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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