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झारखंड में गरीब बच्चों के लिए बड़ी पहल! जन्मजात हृदय रोग का मुफ्त इलाज, 350 से ज्यादा बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी

रिम्स रांची में Gift of Life कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की स्क्रीनिंग रिम्स रांची में Gift of Life कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की स्क्रीनिंग

आधुनिक जांच के बाद तय होगा इलाज, रिम्स में स्थायी कार्डियक सुविधा विकसित करने पर जोर

रांची: झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों के इलाज के लिए बड़ी पहल शुरू हुई है। रिम्स में ‘Gift of Life’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों से आए बच्चों की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उनका इलाज और हार्ट सर्जरी कराई जाएगी। रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किया। इस अभियान में अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञ डॉक्टर भी सहयोग कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के बाद जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होगी, उन्हें आगे के इलाज के लिए चुना जाएगा।

गरीब परिवारों के बच्चों के इलाज का खर्च सरकार उठाएगी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने गरीबी को करीब से देखा है। उन्होंने ऐसे परिवारों की परेशानी देखी है, जो पैसे की कमी के कारण अपने बच्चों का इलाज नहीं करा पाते। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि झारखंड में किसी गरीब बच्चे की मौत इलाज के अभाव में न हो। मंत्री के मुताबिक, जरूरत के अनुसार बच्चों के इलाज पर 5 से 10 लाख रुपये और गंभीर मामलों में 10 से 15 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की ओर से उठाया जाएगा। इलाज के दौरान जरूरी जांच, ऑपरेशन, दवाइयां, अस्पताल में रहने और फॉलोअप जैसी सुविधाओं को भी शामिल करने की बात कही गई है।

जन्मजात हृदय रोग क्या होता है?
जन्मजात हृदय रोग ऐसी बीमारी है, जिसमें बच्चे के दिल की बनावट में जन्म से ही कोई समस्या होती है। कुछ बच्चों के दिल में छेद होता है। इसके अलावा दिल के वाल्व या बड़ी रक्त वाहिकाओं में भी जन्म से परेशानी हो सकती है। इसके कुछ सामान्य प्रकार हैं:

  • VSD: दिल के निचले हिस्से की दो दीवारों के बीच छेद।
  • ASD: दिल के ऊपरी हिस्से की दो दीवारों के बीच छेद।
  • PDA: जन्म के बाद बंद होने वाली रक्त वाहिका का खुला रह जाना।
  • वाल्व की बीमारी: दिल के वाल्व का ठीक से काम नहीं करना।
  • जटिल हृदय रोग: दिल की बनावट में एक से ज्यादा गंभीर समस्याएं होना।
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हालांकि, हर बच्चे में बीमारी की गंभीरता एक जैसी नहीं होती। कुछ छोटे छेद समय के साथ खुद भी बंद हो सकते हैं, जबकि कुछ बच्चों को दवा, कैथेटर प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
जन्मजात हृदय रोग के लक्षण हर बच्चे में अलग हो सकते हैं। माता-पिता को कुछ खास लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे:

  • दूध पीते समय बच्चा जल्दी थक जाए।
  • दूध पीते समय सांस तेज चले या पसीना आए।
  • बच्चे का वजन ठीक से न बढ़े।
  • होंठ या जीभ नीली दिखाई दे।
  • बार-बार फेफड़ों में संक्रमण या निमोनिया हो।
  • सांस लेने में परेशानी हो।
  • सामान्य गतिविधियों में भी बच्चा जल्दी थक जाए।
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ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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आधुनिक जांच के बाद तय होगा इलाज
‘Gift of Life’ अभियान में बच्चों की बीमारी की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग जांच की जाएगी। इनमें जरूरत के अनुसार 2D Echo, Color Doppler, ECG, Pulse Oximetry और Chest X-ray जैसी जांच शामिल हो सकती हैं। जांच के बाद डॉक्टर तय करेंगे कि बच्चे को केवल निगरानी और दवा की जरूरत है या कैथेटर प्रक्रिया अथवा सर्जरी की। गंभीर मामलों में हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

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माता-पिता की आंखों में दिखी राहत
कार्यक्रम में बच्चों के साथ पहुंचे कई माता-पिता भावुक नजर आए। आर्थिक परेशानी के कारण बच्चों का इलाज नहीं करा पाने वाले परिवारों को अब उम्मीद है कि उनके बच्चों का इलाज संभव हो सकेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को इलाज के लिए अपनी जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटेगा, तभी इस अभियान की असली सफलता मानी जाएगी।

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रिम्स में स्थायी कार्डियक सुविधा विकसित करने पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने रिम्स में जन्मजात हृदय रोग के इलाज और सर्जरी की स्थायी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक उपकरणों, ऑपरेशन थिएटर, ICU और प्रशिक्षित मेडिकल टीम की व्यवस्था करने की दिशा में काम करने की बात कही गई। मंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चों को गंभीर बीमारी के इलाज के लिए बार-बार दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत न पड़े, यह सरकार का लक्ष्य है।

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एक साल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहाली का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञों का सहयोग इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राज्य में जन्मजात हृदय रोग के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। अगले एक वर्ष में आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली और उपकरणों की खरीद की दिशा में कदम उठाने की बात भी कही गई।

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जनप्रतिनिधियों से बच्चों की जानकारी देने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि उनके क्षेत्र में यदि कोई बच्चा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है और पैसे की कमी के कारण उसका इलाज नहीं हो पा रहा है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अस्पताल और सुविधाएं बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी बचाना है। कार्यक्रम में रिम्स के निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अमृता हॉस्पिटल कोच्चि के विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, मेडिकल स्टाफ और बच्चों के अभिभावकों समेत कई लोग मौजूद रहे।

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