धनबाद में ED का बड़ा एक्शन: 31 ठिकानों पर छापेमारी, ₹160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज
200 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज मिले
धनबाद: झारखंड के कोयलांचल धनबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हलचल मच गई है। अवैध कोयला खनन, तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ईडी ने मंगलवार को एक साथ 31 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रांची जोनल कार्यालय की टीम द्वारा की गई। ईडी के अनुसार, जांच में अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने और उसे चल-अचल संपत्तियों में निवेश किए जाने की आशंका के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
किन लोगों के ठिकानों पर हुई छापेमारी?
ईडी ने बताया कि छापेमारी अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान तथा उनसे जुड़े लोगों के परिसरों पर की गई। इसके अलावा गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव और माधव सिंह सहित अन्य व्यक्तियों के ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर दाखिल चार्जशीट से प्राप्त तथ्यों के आधार पर शुरू की गई है।
पुलिस जांच में सामने आया था सिंडिकेट
ईडी के मुताबिक, झारखंड पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि एक संगठित सिंडिकेट धनबाद और आसपास के जिलों में अवैध कोयला खनन, कोयले की तस्करी और अवैध उठाव के कारोबार में कथित रूप से शामिल था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी का आरोप है कि इस कथित अवैध कारोबार से बड़ी मात्रा में धन अर्जित किया गया, जिसे बाद में विभिन्न कंपनियों, शेल कंपनियों और अन्य व्यक्तियों के माध्यम से वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
₹160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज
छापेमारी के बाद ईडी ने बताया कि जांच के दौरान कोयला कारोबारी एलबी सिंह से जुड़े लगभग ₹160 करोड़ के म्यूचुअल फंड निवेश को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा विभिन्न परिसरों से ₹1.02 करोड़ नकद भी बरामद किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि बरामद नकदी और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
200 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज मिले
ईडी की कार्रवाई के दौरान 200 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। एजेंसी को संदेह है कि इनमें से कई संपत्तियां कथित अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन से खरीदी गई हो सकती हैं। जांच एजेंसी अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के समय उपलब्ध आय के स्रोत और वित्तीय क्षमता की जांच करेगी।
शेल कंपनियों और बेनामी निवेश की जांच
ईडी का आरोप है कि कथित अवैध कमाई को वैध बनाने के लिए कई संस्थानों, शेल कंपनियों और अन्य व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी संदेह जताया गया है कि कई संपत्तियां अन्य लोगों के नाम पर खरीदी गईं। अब जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि जिन व्यक्तियों के नाम पर संपत्तियां दर्ज हैं, उनके पास खरीद के समय वैध आय और निवेश की पर्याप्त क्षमता थी या नहीं।
सामने आ सकते हैं और बड़े नाम
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों की जांच के दौरान कुछ और प्रभावशाली नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि, ईडी ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है। फिलहाल एजेंसी जब्त दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, निवेश संबंधी कागजात और संपत्ति के दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अभी जांच का हिस्सा है और मामले में आगे भी पूछताछ तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी पूरे वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके






