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रांची में जल्द शुरू होगा 2800 बेड का ‘रिम्स-2’, 2514 करोड़ के प्रोजेक्ट की पर्यावरण मंजूरी की तैयारी तेज

RIMS 2 Ranchi

कांके-नगड़ी में बनेगा मल्टी-स्पेशियलिटी टीचिंग हॉस्पिटल सह मेडिकल कॉलेज

सितंबर अंत तक कंसल्टेंट चयन का लक्ष्य

रांची: राजधानी रांची में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ी परियोजना अब धरातल पर उतरने की ओर बढ़ रही है। कांके (नगड़ी) में प्रस्तावित 2800 बेड वाले ‘रिम्स-2’ मल्टी-स्पेशियलिटी टीचिंग हॉस्पिटल सह मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य को गति देने की प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। करीब 2514 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए निर्माण शुरू होने से पहले पर्यावरण मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCCL) की ओर से Environmental Clearance हासिल करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए विशेषज्ञ कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

पर्यावरण मंजूरी के लिए नियुक्त होगा विशेषज्ञ कंसल्टेंट
JSBCCL ने ‘रिम्स-2’ प्रोजेक्ट के लिए कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक एजेंसियों से आवेदन मांगे गए हैं और सितंबर के अंत तक कंसल्टेंट का चयन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। चयनित कंसल्टेंट की जिम्मेदारी केवल पर्यावरणीय अध्ययन तक सीमित नहीं होगी। वह प्रस्तावित अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करेगा और उससे संबंधित रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके साथ ही परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों और अनुमतियों को प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी कंसल्टेंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी, अब ग्राउंड पर काम की तैयारी
रांची के नगड़ी में बनने वाले इस विशाल अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब कार्य आवंटन से पहले पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि निर्माण एजेंसी को काम सौंपे जाने के बाद परियोजना को किसी पर्यावरणीय या प्रशासनिक अनुमति के कारण रोकना न पड़े। इसी वजह से जरूरी औपचारिकताओं को पहले ही पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है।

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क्यों अहम है पहले Environmental Clearance लेना?
इतने बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का निर्माण एक सामान्य भवन परियोजना की तुलना में काफी व्यापक होता है। इसमें बड़ी संख्या में मरीजों, डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और कर्मचारियों की आवाजाही के साथ-साथ पानी, बिजली, सीवेज, मेडिकल वेस्ट और अन्य सुविधाओं का भी प्रबंधन करना होगा। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए प्रशासन निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही इसे पूरा करने पर जोर दे रहा है। इंजीनियरों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अगर पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया पहले पूरी हो जाती है, तो टेंडर फाइनल होने और कार्य आवंटन के बाद निर्माण कार्य को तेजी से जमीन पर उतारने में मदद मिलेगी।

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2800 बेड की क्षमता से बढ़ेगी स्वास्थ्य सुविधाएं
‘रिम्स-2’ के रूप में प्रस्तावित 2800 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी टीचिंग हॉस्पिटल सह मेडिकल कॉलेज रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इस तरह की बड़ी चिकित्सा परियोजना से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए अतिरिक्त क्षमता विकसित होने के साथ मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी विस्तार की संभावना है। परियोजना की अनुमानित लागत 2514 करोड़ रुपये है। निर्माण शुरू होने से पहले पर्यावरण मंजूरी और अन्य आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाने में किसी तरह की बाधा न आए।

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अब कंसल्टेंट चयन पर नजर
फिलहाल परियोजना के अगले चरण में सबसे महत्वपूर्ण कदम पर्यावरण कंसल्टेंट का चयन है। सितंबर के अंत तक चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पर्यावरणीय अध्ययन और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का काम आगे बढ़ेगा। इसके बाद संबंधित मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि जरूरी प्रक्रियाएं समानांतर रूप से आगे बढ़ें और ‘रिम्स-2’ का निर्माण जल्द से जल्द धरातल पर शुरू किया जा सके।

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