केरेडारी कोल खदान बंद रहने से पावर सेक्टर में बढ़ी चिंता
मुनादी लाइव : झारखंड की महत्वपूर्ण केरेडारी कोल खदान के 10 मार्च 2026 से बंद रहने से पावर सेक्टर में चिंता गहराने लगी है। यह खदान बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति का एक अहम स्रोत मानी जाती है, और इसके बंद रहने से ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई संस्थानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
खदान बंद होने का सबसे बड़ा असर NTPC Mining Limited और उससे जुड़े पावर प्लांटों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जो कोयले की नियमित आपूर्ति पर निर्भर हैं।
खदान संचालन में आई ठहराव की स्थिति
केरेडारी परियोजना के विकास और संचालन की जिम्मेदारी BGR Mining & Infra Limited को सौंपी गई है। हालांकि, परियोजना का जिम्मा मिलने के बावजूद कंपनी अब तक खदान को पुनः चालू करने में सफल नहीं हो पाई है।
इस कारण पूरे प्रोजेक्ट में ठहराव की स्थिति बनी हुई है और खदान क्षेत्र में खनन से जुड़ी सभी गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ी हैं।
प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं
स्थानीय प्रशासन भी इस गतिरोध को समाप्त करने में अब तक सफल नहीं हो पाया है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद खदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक औद्योगिक परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरे पावर सेक्टर की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है असर
देश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के बीच इस तरह की महत्वपूर्ण कोयला परियोजना का बंद रहना ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोयले की आपूर्ति बाधित होती है, तो कई पावर प्लांटों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे भविष्य में बिजली उत्पादन और आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ सकता है।
उद्योग जगत ने उठाए सवाल
उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना को जल्द चालू करने के लिए ठोस और समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उनका मानना है कि बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर सक्रिय पहल करनी चाहिए।
इसके साथ ही राज्य सरकार को भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हुए लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालना होगा।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस स्थिति का जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह न केवल झारखंड बल्कि देश के पावर सेक्टर के लिए भी कोयले की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में सरकार, प्रशासन और कंपनी के बीच बेहतर समन्वय के जरिए इस महत्वपूर्ण परियोजना को जल्द से जल्द चालू करना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति पर किसी प्रकार का संकट न उत्पन्न हो।








