झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 22 से 28 अगस्त, चार दिनों में सरकार के सामने विधेयकों की बड़ी चुनौती

Jharkhand Assembly Monsoon Session 2025 Jharkhand Assembly Monsoon Session 2025

रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र अब 22 अगस्त से 28 अगस्त के बीच आयोजित किया जाएगा। विधानसभा सचिवालय ने संशोधित कैलेंडर जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि इस बार सत्र केवल चार कार्यदिवस का होगा, क्योंकि 23 और 24 अगस्त को शनिवार-रविवार का अवकाश और 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी की छुट्टी रहेगी। पहले यह सत्र 1 से 7 अगस्त तक प्रस्तावित था, लेकिन दिशोम गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए टालना पड़ा था।

अब जबकि नई तारीख तय हो गई है, राज्य सरकार के सामने चुनौती और भी बड़ी हो गई है। महज चार दिनों में ऐसे कई अहम विधेयकों को पेश और पारित कराना होगा, जो आने वाले वर्षों की नीतिगत दिशा तय करेंगे।

क्यों है यह सत्र अहम?
हेमंत सोरेन सरकार के लिए यह सत्र महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक परीक्षा का मैदान है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर सुस्ती और निर्णयहीनता का आरोप लगाता रहा है। वहीं, सरकार इस मंच पर अपने विकास एजेंडे और जनहितकारी विधेयकों के जरिये विपक्ष को करारा जवाब देना चाहती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चार दिनों में इतने बड़े विधायी एजेंडे को निपटाया जा सकता है?

Maa RamPyari Hospital

munadi live whattsapp banne.jpg

ये होंगे प्रमुख विधेयक
इस सत्र में जिन विधेयकों पर सबसे ज्यादा निगाहें होंगी, उनमें शामिल हैं—

  1. झारखंड पंचायती राज (संशोधन) विधेयक
    ग्राम पंचायतों को और अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देने का प्रस्ताव। सरकार का दावा है कि इससे गांवों का विकास तेज होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी।
  2. खनन और पर्यावरण संरक्षण विधेयक
    खनन से होने वाली पर्यावरणीय क्षति को कम करने और स्थानीय समुदायों के लिए पुनर्वास नीतियों को मजबूत करने का मकसद। यह विधेयक सीधे खनन कंपनियों और प्रभावित गांवों के जीवन पर असर डालेगा।
  3. आदिवासी भूमि सुरक्षा विधेयक
    आदिवासी जमीनों के अवैध हस्तांतरण को रोकने और विस्थापन के मामलों में सख्ती लाने का प्रस्ताव। विपक्ष पहले ही दावा कर चुका है कि राज्य में भूमि माफिया और कॉरपोरेट लॉबी सक्रिय हैं, ऐसे में यह विधेयक सरकार की गंभीरता की कसौटी होगा।
  4. साइबर अपराध निवारण विधेयक
    तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान और व्यापक जागरूकता अभियान का प्रावधान।
resizone elanza

Telegram channel

चार दिनों का पूरा कार्यक्रम
22 अगस्त: वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी पेश होगी।

23-24 अगस्त: अवकाश रहेगा।

25 अगस्त: प्रश्नकाल और अनुपूरक व्यय विवरणी पर चर्चा।

26 अगस्त: प्रश्नकाल और राजकीय विधेयकों का प्रस्तुतीकरण व पारित होना।

27 अगस्त: गणेश चतुर्थी की छुट्टी।

28 अगस्त: प्रश्नकाल, विधेयकों की प्रस्तुति और गैर-सरकारी संकल्प।

राजनीतिक पारा चढ़ने के आसार
विधानसभा का हर सत्र राजनीतिक टकराव का मंच बनता है, लेकिन इस बार का मानसून सत्र और भी ज्यादा तीखा हो सकता है। विपक्ष आदिवासी हित, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, खनन माफिया और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सरकार इन आरोपों का जवाब अपने विधायी कार्यों और योजनाओं के जरिए देने की कोशिश करेगी।अगर सरकार समय रहते इन विधेयकों को पास नहीं करा पाई, तो विपक्ष इसे अपनी जीत के तौर पर पेश करेगा।

जनता की उम्मीदें और सरकार की परीक्षा
आम जनता इस सत्र से उम्मीद लगाए बैठी है कि ऐसे कानून बनेंगे जो उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लाएंगे। गांवों को ज्यादा अधिकार, खनन प्रभावितों का पुनर्वास, आदिवासी जमीन की सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव—ये सब मुद्दे सीधे-सीधे आम आदमी से जुड़े हैं। लेकिन समय सीमित है और एजेंडा बड़ा। ऐसे में देखना होगा कि हेमंत सोरेन सरकार इस चुनौती को किस तरह संभालती है।

झारखंड विधानसभा का यह मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अग्निपरीक्षा है। सरकार के लिए यह अवसर है कि वह विकास और जनहित के मुद्दों पर अपनी गंभीरता साबित करे, जबकि विपक्ष के लिए यह मौका है कि वह जनता के सवालों को सदन में मजबूती से उठाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *