सिर्फ एक SMS से खाली हो सकता है बैंक खाता! जानिए कैसे पहचानें फर्जी मैसेज और कैसे रखें अपनी डिजिटल कमाई सुरक्षित
बैंक, सरकारी विभाग और कूरियर कंपनियों के नाम पर भेजे जाते हैं फर्जी संदेश।
किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले आधिकारिक माध्यम से करें पुष्टि।
साइबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन और संचार साथी पोर्टल पर करें।
मुनादी लाइव: भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था तेजी से आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने लेन-देन को पहले से अधिक आसान और तेज बना दिया है। लेकिन डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ी है। इसी को देखते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने टेक्स्ट मैसेज (SMS) के जरिए होने वाली डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
NPCI का कहना है कि आज बड़ी संख्या में साइबर ठगी की शुरुआत एक साधारण दिखने वाले टेक्स्ट मैसेज से होती है। ऐसे संदेश लोगों में डर, लालच, जिज्ञासा या जल्दबाजी पैदा कर उन्हें गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। यही तरीका साइबर अपराधी “सोशल इंजीनियरिंग” के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
क्या होता है टेक्स्ट मैसेज स्कैम?
टेक्स्ट मैसेज स्कैम ऐसा फर्जी SMS होता है, जिसका उद्देश्य लोगों को धोखे से कोई ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर करना होता है जिससे उनकी निजी जानकारी, बैंक खाता या डिजिटल वॉलेट खतरे में पड़ जाए। ऐसे संदेश अक्सर किसी बैंक, सरकारी विभाग, टेलीकॉम कंपनी, कूरियर सेवा या किसी भरोसेमंद संस्था के नाम से भेजे जाते हैं, जिससे वे पहली नजर में असली प्रतीत होते हैं। NPCI के अनुसार, यदि किसी मैसेज में बिना पुष्टि के तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा है, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
स्कैमर्स आपसे क्या करवाना चाहते हैं?
NPCI ने बताया कि अधिकांश टेक्स्ट मैसेज फ्रॉड का उद्देश्य लोगों से निम्नलिखित कार्य करवाना होता है—
- किसी फर्जी लिंक पर क्लिक कराना।
- नकली कस्टमर केयर या हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करवाना।
- अज्ञात ऐप या फाइल डाउनलोड करवाना।
- OTP, UPI PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी हासिल करना।
- किसी बहाने पैसे ट्रांसफर करवाना या फर्जी भुगतान का झांसा देना।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही कोई व्यक्ति इन जाल में फंसता है, उसके बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट या अन्य ऑनलाइन खातों से जुड़ी जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है।

भरोसा जीतकर करते हैं ठगी
NPCI के अनुसार, साइबर अपराधी पहले लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं। वे खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, बीमा एजेंट, टेलीकॉम कंपनी, डिलीवरी एजेंसी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर संपर्क करते हैं।

कई बार वे यह दावा करते हैं कि आपका बैंक खाता बंद होने वाला है, KYC अपडेट नहीं हुआ है, बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा या आपके नाम पर कोई इनाम निकला है। इन संदेशों का उद्देश्य लोगों को सोचने का समय दिए बिना तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर करना होता है।
डिजिटल भुगतान करते समय रखें ये सावधानियां
NPCI ने नागरिकों से डिजिटल भुगतान करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की अपील की है—
- किसी भी SMS को ध्यान से पढ़ें और जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें।
- किसी भी संदेश की पुष्टि संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या अधिकृत कस्टमर केयर से करें।
- ऐप केवल Google Play Store या Apple App Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करें।
- अपना OTP, UPI PIN, ATM PIN, पासवर्ड या CVV किसी के साथ साझा न करें।
- अनजान लिंक पर क्लिक करने या APK फाइल डाउनलोड करने से बचें।
- खाते में पैसे आने का दावा करने वाले संदेश पर भरोसा करने से पहले बैंक स्टेटमेंट या बैंकिंग ऐप में राशि की पुष्टि करें।
- किसी भी ऐप को इंस्टॉल करते समय उसकी Permissions ध्यान से पढ़ें और केवल आवश्यक अनुमतियां ही दें।
रिकॉर्ड रखें, तुरंत करें शिकायत
यदि किसी संदिग्ध SMS या साइबर ठगी का सामना होता है, तो NPCI ने लोगों को सलाह दी है कि—
- संदिग्ध संदेश का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- कॉल, चैट और अन्य बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखें।
- किसी भी संदिग्ध मोबाइल नंबर या साइबर ठगी की शिकायत तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।
- दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल के माध्यम से भी संदिग्ध नंबरों और साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है।
डिजिटल भारत में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान जितना सुविधाजनक है, उतनी ही सावधानी भी आवश्यक है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और आधिकारिक माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करना ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है। NPCI ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें और अपनी बैंकिंग जानकारी किसी भी परिस्थिति में साझा न करें।
भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर धोखाधड़ी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। NPCI की यह जागरूकता पहल लोगों को सतर्क रहने और डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रत्येक नागरिक संदिग्ध संदेशों की पहचान करना सीख ले और OTP, UPI PIN तथा बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचे, तो बड़ी संख्या में साइबर ठगी की घटनाओं को रोका जा सकता है।






