पकरी बरवाडीह कोल परियोजना: RTI में बड़ा खुलासा, 34 गांव प्रभावित

Pakri Barwadih
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दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh

Hazaribagh: बड़कागांव स्थित NTPC की पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग परियोजना को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दिए गए जवाब में कंपनी ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इस परियोजना से कुल 34 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

यह जानकारी बड़कागांव थाना क्षेत्र के जुगरा गांव निवासी नेपुल कुमार द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में सामने आई। आरटीआई आवेदन 17 जनवरी 2026 को दायर किया गया था, जिसका उत्तर 30 जनवरी 2026 को NTPC के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी विकास कुमार ने उपलब्ध कराया।

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आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़ 1
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

किन मुद्दों पर है विवाद
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इन 34 गांवों में वर्षों से कई गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं:

  • जमीन अधिग्रहण को लेकर असंतोष
  • मुआवजे की राशि और प्रक्रिया पर सवाल
  • विस्थापन के बाद पुनर्वास की अधूरी व्यवस्था
  • पर्यावरणीय नुकसान और जंगल क्षेत्र में कमी
  • खेती और पारंपरिक आजीविका पर असर
सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह
अनिल शर्मा सर
किशन जयसवाल
गोविंद मेवाड़
छोटू सिंह
जॉनी अग्रवाल
डॉ. राकेश सिंह
तिलक राज मंगलम
बंटी मोदी
मनोज अग्रवाल
मुकेश राम
राजू गुप्ता उर्फ जयनारायण साहू
राहुल कुमार उर्फ सोनू

स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना के कारण न सिर्फ जमीन गई, बल्कि रोजगार के पारंपरिक साधन भी कमजोर पड़े हैं।

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आजीविका और पर्यावरण पर असर
प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि खेती योग्य जमीन, जल स्रोत और वन क्षेत्र पर खनन गतिविधियों का सीधा असर पड़ा है। इससे पशुपालन, कृषि और जंगल आधारित जीवनयापन करने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

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सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि पुनर्वास नीतियों के क्रियान्वयन में देरी और विसंगतियों के कारण कई परिवार अब भी अनिश्चितता में जीवन बिता रहे हैं।

प्रशासनिक और कानूनी बहस तेज
इस RTI खुलासे के बाद अब यह मुद्दा एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा में आ गया है। ग्रामीण संगठनों का कहना है कि जब खुद कंपनी ने 34 गांव प्रभावित माने हैं, तो मुआवजा, पुनर्वास और सामाजिक दायित्वों को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी कार्रवाई होनी चाहिए।

आने वाले समय में इस खुलासे के आधार पर प्रभावित ग्रामीणों द्वारा कानूनी या जनआंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है।

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