ज्ञानेश कुमार नहीं हटे तो PM मोदी के इस्तीफे की मांग, दिपके का ऐलान

Abhijeet Dipke

मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद CJP ने फिर दिल्ली कूच की तैयारी की, वोटर लिस्ट को लेकर लगाए गंभीर आरोप

मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। 2 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में आयोजित प्रदर्शन के दौरान दिपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जाएगा। दिपके ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर ‘Jantar Mantar 2.0’ प्रदर्शन की घोषणा की है। उनके मुताबिक देशभर से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। यह घोषणा मुंबई में हुए प्रदर्शन के बाद की गई है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित प्रदर्शन में CJP समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अलग-अलग नारे लिखी तख्तियां थीं और कार्यक्रम के दौरान भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा नारेबाजी भी हुई। दिपके ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

PM मोदी के इस्तीफे की मांग का भी ऐलान
दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी राजनीतिक आरोप लगाए। उनके मुताबिक यदि ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहते हैं, तो आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी। यह दिपके और CJP की राजनीतिक मांग और आरोप हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

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13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने का दावा
दिपके ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है। समाचार रिपोर्टों में भी इस आंकड़े को दिपके के आरोप के तौर पर ही दर्ज किया गया है। CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं। संगठन की मांगों में CEC के इस्तीफे के साथ कथित अनियमितताओं की जांच और मतदाता सूची से जुड़े बदलावों पर पुनर्विचार जैसी मांगें भी शामिल हैं।

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‘एक देश, एक चुनाव’ पर भी सवाल
दिपके ने केंद्र की ‘एक देश, एक चुनाव’ की पहल को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP की रणनीति आगे चलकर ‘एक देश, एक पार्टी’ की दिशा में जा सकती है। यह भी दिपके का राजनीतिक आरोप है। ‘एक देश, एक चुनाव’ का प्रस्ताव अपने आप में ‘एक देश, एक पार्टी’ की नीति घोषित नहीं करता।

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क्षेत्रीय दलों को लेकर BJP पर आरोप
अपने भाषण में दिपके ने महाराष्ट्र की राजनीति का हवाला देते हुए शिवसेना और NCP में हुई राजनीतिक टूट का जिक्र किया। उन्होंने BJP पर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने 2022 से 2026 के बीच सांसदों और विधायकों के दल बदलने के आंकड़े का भी उल्लेख किया और इसे ‘IPL-style auction’ से जोड़कर राजनीतिक टिप्पणी की। इन दावों और उनकी राजनीतिक व्याख्या को दिपके के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

हिंदू-मुस्लिम मुद्दे से ऊपर उठने की अपील
दिपके ने अपने भाषण में हिंदू-मुस्लिम राजनीतिक विभाजन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने समर्थकों से धर्म के आधार पर मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन नागरिकों को देश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मुद्दों पर एक साथ आना चाहिए।

मुंबई के बाद दिल्ली की तैयारी
2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और CJP समर्थक शामिल हुए। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में फिल्म जगत से जुड़े कुछ लोग भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान CEC के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और नारे लगाए गए। CJP ने मुंबई के बाद अन्य शहरों में भी आंदोलन करने की बात कही है। दिपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अगले बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर जारी बहस
मतदाता सूची में संशोधन और SIR को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न समूहों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर तथ्यात्मक जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में CJP के आरोप और आंदोलन की मांगें राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं, जबकि मतदाता सूची में कथित बड़े पैमाने पर हेरफेर जैसे दावों की पुष्टि के लिए के लिए आधिकारिक और स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे। अब निगाह 10 अक्टूबर के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन पर है और यह देखना होगा कि CJP अपने घोषित आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाता है।

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