सोहराय भवन में JMM का महामंथन, खनिज विधेयक के खिलाफ आंदोलन का बनेगा रोडमैप
रांची: झारखंड की राजनीति में आज का दिन अहम माना जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की विस्तारित केंद्रीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक रांची स्थित सोहराय भवन में शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री और JMM के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय समिति के सदस्य और संगठन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी सोहराय भवन पहुंच चुकी हैं।बैठक को लेकर पार्टी के भीतर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में संगठन से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ झारखंड के राजनीतिक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। हालांकि, सबसे बड़ा मुद्दा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर रहेगा।
खनिज विधेयक के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
JMM लगातार इस विधेयक को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहा है। पार्टी का मानना है कि खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े अधिकारों का मुद्दा झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पार्टी इस विषय को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य के व्यापक हित और अधिकारों से जुड़े सवाल के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। सोहराय भवन में होने वाली बैठक में इसी आंदोलन को व्यापक रूप देने पर चर्चा हो सकती है। पार्टी के नेता आंदोलन का स्वरूप, कार्यक्रम, संगठन की भागीदारी और आम लोगों तक मुद्दे को पहुंचाने की रणनीति पर विचार करेंगे। बैठक के बाद JMM की ओर से आंदोलन को लेकर स्पष्ट कार्यक्रम सामने आने की संभावना है। पार्टी किस स्तर पर आंदोलन करेगी, किन जिलों में कार्यक्रम आयोजित होंगे और संगठन के कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका होगी, इसे लेकर भी दिशा तय की जा सकती है।
संगठन को मजबूत करने पर भी फोकस
JMM की यह बैठक केवल खनिज विधेयक तक सीमित नहीं रहने वाली है। पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यक्रमों को लेकर भी रणनीति तैयार की जाएगी। केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक में जिलों और प्रखंड स्तर तक संगठन को अधिक सक्रिय बनाने, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने पर मंथन हो सकता है। JMM के लिए संगठन को मजबूत करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी आने वाले राजनीतिक दौर में अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में तय होगी आगे की दिशा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक पर राजनीतिक हलकों की भी नजर है। राज्य सरकार की नीतियों और केंद्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का रुख किस तरह आगे बढ़ेगा, इसका संकेत बैठक के बाद मिल सकता है। खनिज विधेयक को लेकर JMM पहले ही अपना विरोध स्पष्ट कर चुका है। अब पार्टी इस विरोध को किस रूप में आगे बढ़ाती है, यह बैठक के बाद सामने आएगा। पार्टी के लिए चुनौती यह भी होगी कि आंदोलन को संगठनात्मक स्तर पर मजबूत करने के साथ-साथ इसे आम जनता के मुद्दे से जोड़ा जाए।
कल्पना सोरेन की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ गांडेय विधायक कल्पना सोरेन की मौजूदगी भी बैठक को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। पार्टी के भीतर महिला नेतृत्व और जनसंपर्क के स्तर पर कल्पना सोरेन की सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। ऐसे में विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक में उनकी मौजूदगी पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के बाद साफ होगी JMM की रणनीति
फिलहाल सभी की नजर बैठक के निष्कर्ष पर टिकी है। खनिज विधेयक के खिलाफ आंदोलन को लेकर JMM किस तरह का कार्यक्रम घोषित करता है, संगठन को मजबूत करने के लिए क्या फैसले लिए जाते हैं और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर पार्टी की क्या दिशा रहती है—इन सभी सवालों के जवाब बैठक के बाद सामने आने की उम्मीद है। कुल मिलाकर सोहराय भवन में होने वाला यह महामंथन झारखंड की राजनीति में JMM की आगामी रणनीति की तस्वीर साफ कर सकता है। खनिज अधिकारों से लेकर संगठन की मजबूती तक, बैठक में लिए जाने वाले फैसले आने वाले दिनों में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता का आधार बन सकते हैं।





