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डीजल पर केंद्र के नए नियम से झारखंड में हड़कंप, किसानों से अस्पताल तक परेशान

New diesel sales rules

रांची: भारत सरकार द्वारा जारी संशोधित पेट्रोलियम कंट्रोल ऑर्डर 2026 के खिलाफ झारखंड में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर नए नियमों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संशोधन और राहत देने की मांग की है।

एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से 11 जून 2026 को जारी आदेश के तहत प्रति उपभोक्ता प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल आपूर्ति की सीमा तय कर दी गई है। साथ ही वाहनों के अलावा केवल PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation) से प्रमाणित कंटेनरों में ही डीजल बिक्री की अनुमति दी गई है। इन नियमों के कारण राज्यभर में डीलरों और उपभोक्ताओं को गंभीर व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल, मोबाइल टावर और उद्योगों पर असर
एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, मोबाइल टावर, बैंक, कृषि पंपसेट, लघु उद्योग और सड़क निर्माण परियोजनाओं को प्रतिदिन 200 लीटर से कहीं अधिक डीजल की आवश्यकता होती है। ऐसे में नई सीमा लागू होने के बाद इन संस्थानों की नियमित गतिविधियां प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। डीलरों का कहना है कि उपभोक्ताओं की वास्तविक जरूरत पूरी नहीं होने से असंतोष बढ़ रहा है और कई जगहों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

किसानों पर पड़ रहा सीधा असर
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि बाजार में छोटे आकार के PESO प्रमाणित कंटेनरों की भारी कमी है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है, जो सिंचाई और कृषि कार्यों के लिए कम मात्रा में डीजल खरीदते हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अभी भी पारंपरिक ड्रम और कैन के माध्यम से डीजल ले जाते हैं। नए नियम लागू होने के बाद उनके लिए डीजल प्राप्त करना मुश्किल हो गया है।

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राज्य सरकार से छूट देने की मांग
डीलर्स एसोसिएशन ने कहा है कि केंद्र सरकार की अधिसूचना की धारा-4 राज्य सरकारों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक छूट देने का अधिकार प्रदान करती है। इसी प्रावधान का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने मांग की है कि अस्पतालों, मोबाइल टावरों, कृषि कार्यों और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए 200 लीटर की सीमा में छूट दी जाए। इसके अलावा खाली लुब्रिकेंट ड्रम और सुरक्षित एचडीपीई (HDPE) कैन में भी डीजल आपूर्ति की अनुमति प्रदान की जाए।

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जनहित में समाधान की उम्मीद
पेट्रोलियम डीलर्स का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो राज्य में आवश्यक सेवाओं और कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह स्थानीय जरूरतों को देखते हुए इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है।

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