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DFO मौन प्रकाश पर 13 करोड़ की योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप, सरकार ने मांगी रिपोर्ट

DFO Maun Prakash corruption allegations

हजारीबाग: हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के प्रभागीय वन पदाधिकारी (DFO) मौन प्रकाश पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर राज्य सरकार ने संज्ञान लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) संजीव कुमार से रिपोर्ट तलब की है और आवश्यक कार्रवाई कर सरकार को अवगत कराने का निर्देश दिया है। सरकार के अवर सचिव मितरंजू कुमार द्वारा जारी पत्र में शिकायतकर्ता उमेश सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों का उल्लेख करते हुए मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है।

पार्क और कॉटेज निर्माण में अनियमितता का आरोप
शिकायतकर्ता उमेश सिंह ने आरोप लगाया है कि हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के बरही प्रक्षेत्र स्थित बंदगी (बरही डैम विश्रामागार) क्षेत्र में प्रस्तावित पार्क और कॉटेज निर्माण योजनाओं में वित्तीय अनियमितता की आशंका है। शिकायत के अनुसार:

  • पार्क निर्माण की प्रस्तावित लागत लगभग 9 करोड़ रुपये है।
  • 10 कॉटेज निर्माण योजना की अनुमानित लागत लगभग 4.44 करोड़ रुपये बताई गई है।
  • प्रस्तावित स्थल पर अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
  • क्षेत्र में बड़ी संख्या में सखुआ और अन्य प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि योजनाओं को जल्दबाजी में स्वीकृत कराने और राशि निकासी की मंशा से प्रस्ताव तैयार किए गए।

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वन क्षेत्र पदाधिकारी पर भी आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन क्षेत्र पदाधिकारी सत्येन्द्र चौधरी की कथित मिलीभगत से फर्जी वाउचर और मास्टर रोल के माध्यम से राशि निकासी की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की जानी बाकी है।

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पूर्व सांसद ने भी उठाए थे सवाल
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने दिसंबर 2025 में वन संरक्षक, हजारीबाग अंचल को पत्र लिखकर DFO मौन प्रकाश के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे संबंधित अधिकारियों का मनोबल बढ़ा है।

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PCCF को कार्रवाई का निर्देश
राज्य सरकार ने PCCF को निर्देश दिया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर समुचित कार्रवाई करें और उसकी जानकारी सरकार को उपलब्ध कराएं। फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
वन विभाग से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की नजर PCCF द्वारा की जाने वाली जांच और सरकार को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है।

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