पेपर लीक पर सख्त कानून लोकसभा से पास, संगठित अपराध पर 7 से 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान
राज्यसभा ने वंदे मातरम् संशोधन विधेयक भी किया पारित
नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक तथा संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्ती के उद्देश्य से केंद्र सरकार का पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 मंगलवार को लोकसभा से पारित हो गया। सरकार का कहना है कि यह संशोधन 2024 के मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाएगा तथा पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसी दिन संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दे दी। इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय सम्मान संबंधी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाना है।
पेपर लीक के खिलाफ और सख्त होगा कानून
केंद्र सरकार ने यह संशोधन ऐसे समय लाया है जब हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे हैं। सरकार का कहना है कि लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने वाले ऐसे मामलों पर कठोर दंड जरूरी है ताकि परीक्षा प्रणाली में विश्वास कायम रहे। यह संशोधन पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में बदलाव करता है और कई अपराधों के लिए सजा तथा जुर्माने को पहले की तुलना में और कड़ा बनाता है।
क्या हैं नए कानून के प्रमुख प्रावधान?
संशोधन विधेयक के तहत संगठित परीक्षा अपराधों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों बढ़ाए गए हैं। प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—
- संगठित पेपर लीक और परीक्षा अपराध में न्यूनतम 7 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल।
- ऐसे मामलों में न्यूनतम ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान।
- परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के लिए भी सजा और जुर्माने की सीमा बढ़ाई गई है।
- परीक्षा संचालन से जुड़े सेवा प्रदाताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच
विधेयक में केवल सजा बढ़ाने का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत—
- जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी करने का प्रावधान।
- मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट।
- विशेष लोक अभियोजकों (Special Public Prosecutors) की नियुक्ति।
- अपीलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था।
सरकार का मानना है कि इससे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी और लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी।
सरकार ने क्या कहा?
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून का उद्देश्य केवल कठोर दंड देना नहीं, बल्कि युवाओं का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना भी है।
विपक्ष ने भी रखे सुझाव
संसद में हुई चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। कुछ सदस्यों ने कहा कि कठोर कानून के साथ-साथ परीक्षा संचालन, तकनीकी सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करने की जरूरत है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को जड़ से रोका जा सके।
राज्यसभा से वंदे मातरम् संशोधन विधेयक भी पारित
राज्यसभा ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव है। विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
आगे क्या होगा?
लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद दोनों विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। राष्ट्रपति की स्वीकृति और राजपत्र अधिसूचना के बाद ये संशोधन कानून के रूप में लागू होंगे।







