CDPO परीक्षा में भी सेटिंग-गेटिंग का दावा! अभय तिवारी ने पूछताछ में खोले कथित धांधली के राज
पूर्व JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते और सदस्य अजिता भट्टाचार्य समेत अन्य पर लगाए गंभीर आरोप
64 पदों की प्रतियोगिता परीक्षा में अनियमितता का दावा
रांची: झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर चल रही जांच के बीच अब CDPO परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर भी बड़ा दावा सामने आया है। टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से पूछताछ में कथित सेटिंग-गेटिंग के जरिए नियुक्ति परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को सफल कराने के खेल से जुड़े कई खुलासे होने की बात सामने आ रही है। पूछताछ के दौरान अभय तिवारी ने CDPO के 64 पदों के लिए आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा में भी कथित धांधली का दावा किया है। उसके दावे के मुताबिक, JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते, पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य समेत अन्य लोगों की कथित मिलीभगत से परीक्षा में अनियमितता की गई। हालांकि, अभय तिवारी की ओर से पूछताछ में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां इन आरोपों की सत्यता और इसमें कथित तौर पर शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
सामान्य वर्ग की सीटों को लेकर बड़ा दावा
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, CDPO परीक्षा में सामान्य वर्ग के सभी पदों को झारखंड से बाहर के अभ्यर्थियों को कथित तौर पर पैसे लेकर दिलाया गया। दावा किया गया है कि लाखों रुपये लेकर मनमाने तरीके से अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराया गया और बाद में नियुक्ति दिलाने की व्यवस्था की गई। पूछताछ में सामने आए कथित दावे के मुताबिक, परीक्षा में अभ्यर्थियों की सफलता के लिए पहले से कथित सेटिंग की जाती थी और इसके बदले बड़ी रकम ली जाती थी। हालांकि, यह दावा जांच का विषय है और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
आरक्षित सीटों पर झारखंड के अभ्यर्थियों के चयन का दावा
अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि आरक्षित पदों पर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन संभव नहीं होने के कारण इन सीटों पर झारखंड के अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। इस दावे के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि परीक्षा में पदों के वर्गीकरण, अभ्यर्थियों की पात्रता और चयन प्रक्रिया के दौरान कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

सेटिंग-गेटिंग के कथित नेटवर्क की पड़ताल
अभय तिवारी से पूछताछ में कथित तौर पर नियुक्ति परीक्षाओं में सेटिंग-गेटिंग से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और अभ्यर्थियों से संपर्क किस माध्यम से किया जाता था। CDPO परीक्षा में कथित अनियमितता के दावे के बाद जांच एजेंसी परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, चयन सूची और संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है।
पूर्व JPSC पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस मामले में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते और सदस्य अजिता भट्टाचार्य के नाम सामने आने का दावा किया गया है। अभय तिवारी के कथित बयान के आधार पर दोनों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, केवल पूछताछ में दिए गए किसी व्यक्ति के बयान को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसी को स्वतंत्र साक्ष्य और दस्तावेज जुटाने होंगे। संबंधित पूर्व पदाधिकारियों का पक्ष सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
जांच के साथ खुलेंगे और राज?
JPSC और अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कथित सेटिंग-गेटिंग नेटवर्क से जुड़े नए दावे सामने आ रहे हैं। CDPO के 64 पदों वाली परीक्षा को लेकर अभय तिवारी का कथित दावा भी जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CDPO परीक्षा में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई थी? क्या अभ्यर्थियों से पैसे लेकर चयन प्रभावित किया गया और क्या इस पूरी प्रक्रिया में JPSC के तत्कालीन पदाधिकारियों की कोई भूमिका थी? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल जांच एजेंसियां अभय तिवारी के कथित बयानों के साथ-साथ दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो झारखंड की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।






