रांची DC की बड़ी कार्रवाई: पूर्व MLC सुबोध राय के बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस रद्द, सील टूटने के बाद गायब मिला शराब स्टॉक
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में शराब कारोबार से जुड़े मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। रांची DC मंजूनाथ भजंत्री ने ओरमांझी के उकरीद गांव स्थित तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड के बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब सील किए गए प्लांट को दोबारा खोलने पर वहां रखी शराब की पेटियां, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य गायब मिले।प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शराब कारोबार और प्लांट में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। यह प्लांट राजद के पूर्व MLC सुबोध कुमार राय से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले में इससे पहले उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई भी हो चुकी है।
1 जुलाई को हुई थी प्लांट में छापेमारी
जानकारी के मुताबिक, बीते 1 जुलाई को उत्पाद विभाग और ओरमांझी पुलिस की संयुक्त टीम ने उकरीद गांव स्थित तरंगिनी लिकर्स के बॉटलिंग प्लांट में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान प्लांट परिसर में कथित तौर पर शराब के अवैध निर्माण और बिना पंजीकृत स्टॉक रखे जाने से संबंधित जानकारी सामने आई थी। छापेमारी के बाद प्रशासन ने प्लांट को सील कर दिया था। मामले में पूर्व MLC सुबोध कुमार राय समेत देवेंद्र भगत और रविकांत राय को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, सुबोध कुमार राय बाद में जमानत पर बाहर हैं। प्रशासन की ओर से प्लांट को सील करने के बाद वहां मौजूद शराब के स्टॉक, दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों का नियमानुसार सत्यापन किया जाना था।
सील खुली तो पीछे का दरवाजा टूटा मिला
मामले में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ, जब करीब डेढ़ महीने बाद 17 अगस्त को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत प्लांट की सील खोली गई। प्लांट के अंदर की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच के दौरान प्लांट के पीछे का दरवाजा टूटा हुआ मिला। इसके अलावा अंदर रखी शराब की कई पेटियां, जरूरी दस्तावेज और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्य भी गायब पाए गए। सील किए गए परिसर से सामग्री गायब मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से प्लांट के लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई की गई।
आखिर सील किए गए प्लांट में कौन पहुंचा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्लांट प्रशासन की ओर से सील किया गया था, तो उसके अंदर रखे शराब के स्टॉक और महत्वपूर्ण दस्तावेज आखिर कैसे गायब हो गए? सील किए गए परिसर की सुरक्षा और वहां मौजूद सामग्री की निगरानी की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पीछे के दरवाजे का ताला टूटा मिलना इस मामले को और गंभीर बनाता है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि प्लांट में कथित तौर पर कौन दाखिल हुआ, कब दाखिल हुआ और वहां से शराब की पेटियां तथा अन्य सामग्री कैसे बाहर निकाली गई।
लाइसेंस रद्द होने के बाद बढ़ सकती है मुश्किल
रांची DC की ओर से लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद तरंगिनी लिकर्स के संचालन पर बड़ा असर पड़ा है। प्रशासन की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि सील किए गए परिसर से कथित तौर पर स्टॉक और साक्ष्य गायब मिलने की घटना को जिला प्रशासन ने गंभीर उल्लंघन माना है। अब मामले में आगे की जांच के दौरान प्लांट से गायब हुए स्टॉक और दस्तावेजों की जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह भी जांच का विषय रहेगा कि सील टूटने की घटना के लिए कौन जिम्मेदार है और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं।
पहले छापेमारी, फिर सील और अब लाइसेंस रद्द
तरंगिनी लिकर्स का मामला अब तीन बड़े चरणों में पहुंच चुका है—पहले उत्पाद विभाग और पुलिस की छापेमारी, फिर प्लांट को सील किया जाना, और अब सील खोले जाने के दौरान स्टॉक व दस्तावेज गायब मिलने के बाद लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले की जांच पर सबकी नजरें हैं। खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि प्लांट से गायब बताए जा रहे शराब के स्टॉक और दस्तावेजों का पता कैसे लगाया जाता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।





