JPSC-JSSC विवाद: CM के पुतला दहन पर कई जिलों में लाठीचार्ज का दावा, 24 अगस्त से निकलेगी ‘भर्ती सुधार यात्रा’
रांची: झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज होता दिख रहा है। 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक के बाद चयनित अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है।
सरकार के फैसले और हाईकोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर नाराज छात्र संगठनों ने शुक्रवार, 21 अगस्त को पूरे राज्य में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया। आंदोलन के दौरान रांची, गिरिडीह, हजारीबाग समेत कई जिलों में तनाव की स्थिति बनने की बात सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है। वहीं, कुछ स्थानों पर छात्रों और झामुमो समर्थकों के बीच टकराव की भी सूचना है। अब छात्र संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके तहत 24 अगस्त से ‘भर्ती सुधार यात्रा’ निकाली जाएगी। छात्र नेताओं का कहना है कि यह यात्रा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाएगी।
हाईकोर्ट की रोक के बाद भी क्यों जारी है आंदोलन?
दरअसल, झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के आधार पर 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा समेत कई परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई, जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियुक्ति हासिल की थी। चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी प्रक्रिया को रद्द कर सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रभावित करना उचित नहीं है। इसी मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है।
छात्रों ने सरकार पर लगाया धोखे का आरोप
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जहां चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली, वहीं आंदोलनकारी छात्र संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार ने सार्वजनिक रूप से छात्रहित में खड़े होने की बात कही, लेकिन अदालत में हुई कार्रवाई से उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि सरकार की मंशा अलग है। इसी को लेकर छात्रों ने सरकार के खिलाफ विरोध तेज करने का फैसला लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और चयनित अभ्यर्थियों की सेवा सुरक्षा के लिए है।
कई जिलों में पुतला दहन, लाठीचार्ज का आरोप
शुक्रवार को राज्य के कई जिलों में मुख्यमंत्री के पुतले जलाकर छात्रों ने विरोध दर्ज कराया। रांची के अलावा गिरिडीह, हजारीबाग और अन्य जिलों में भी प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई जगहों पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ छात्र घायल हुए। कुछ स्थानों पर छात्रों और झामुमो समर्थकों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की की भी बात सामने आई। हालांकि, लाठीचार्ज और झड़प की घटनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में पूरी स्थिति पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगी।
24 अगस्त से ‘भर्ती सुधार यात्रा’
आंदोलनकारी छात्र संगठनों ने अब आंदोलन को राज्यव्यापी अभियान का रूप देने का फैसला किया है। 24 अगस्त से ‘भर्ती सुधार यात्रा’ शुरू करने की घोषणा की गई है। छात्र नेताओं के मुताबिक, यात्रा के दौरान भर्ती परीक्षाओं में सुधार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई तथा चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सरकार को एक स्पष्ट और पारदर्शी भर्ती नीति बनानी चाहिए।
15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी नजर
फिलहाल इस पूरे विवाद का कानूनी पक्ष झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन नियुक्तियों और परीक्षाओं की अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार की ओर से जांच की स्थिति और नियुक्तियां रद्द करने के फैसले के आधार को लेकर जवाब दाखिल किया जाना है। अदालत की अगली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा और संबंधित नियुक्तियों का भविष्य किस दिशा में जाता है। इस बीच छात्रों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन थमने वाला नहीं है। पुतला दहन के बाद अब ‘भर्ती सुधार यात्रा’ के जरिए आंदोलन को राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जेपीएससी-जेएसएससी विवाद एक बार फिर झारखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है।







