झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा पर ट्रायल, हाईकोर्ट से राहत नहीं
Trial on former Jharkhand CM Madhu Kodaहाईकोर्ट ने खारिज की क्वैशिंग याचिका, निचली अदालत का आदेश बरकरार
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के लिए झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद खत्म हो गई है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले में आरोपी बनाए गए मधु कोड़ा की ओर से दायर क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई अवैधता नहीं है। इस आदेश के बाद अब मधु कोड़ा के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमा यानी ट्रायल चलेगा।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
मामले की सुनवाई के दौरान मधु कोड़ा की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ दर्ज मामला साक्ष्यों के आधार पर टिकता नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि डिस्चार्ज के चरण में साक्ष्य की स्वीकार्यता या गुण-दोष से संबंधित मुद्दों पर विचार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने विनय त्यागी बनाम इरशाद अली केस में स्थापित सिद्धांत का हवाला देते हुए साफ किया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप संभव नहीं है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा जाता है और ट्रायल को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होता है।
पूर्व में ट्रायल पर लगी थी रोक
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी कर ट्रायल पर रोक लगा दी थी। मधु कोड़ा की ओर से दाखिल क्वैशिंग याचिका पर सुनवाई चल रही थी। अब याचिका खारिज हो जाने के बाद निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी।
क्या है मामला?
मधु कोड़ा पर आरोप है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने हैदराबाद की बिजली कंपनी IVRCL के निदेशक डीके श्रीवास्तव से मुंबई में 11.40 करोड़ रुपये रिश्वत ली थी। सीबीआई ने अपनी जांच में यह आरोप लगाया कि इस रिश्वत के एवज में कंपनी को गढ़वा, पलामू, लातेहार समेत छह जिलों में ग्रामीण विद्युतीकरण का टेंडर दिया गया। इस घोटाले को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत अंजाम दिया गया बताया जाता है। सीबीआई ने इस मामले की जांच 2010 में शुरू की थी और आरोप पत्र दाखिल किया था।
कब मिली थी जमानत
इस मामले में मधु कोड़ा को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत मिली थी। तब से यह मामला अदालतों में लंबित था।
कौन हैं मधु कोड़ा?
मधु कोड़ा झारखंड की राजनीति में एक अनोखी शख्सियत माने जाते हैं। वे 2006 में राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री बने थे और विशेष बात यह रही कि वे किसी भी बड़ी राजनीतिक पार्टी से जुड़े बिना निर्दलीय विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे। 2006 से 2008 तक उन्होंने झारखंड की सत्ता संभाली।
हालांकि उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लगे। बाद में आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी उन्हें जेल जाना पड़ा।
झारखंड की राजनीति पर असर
इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला झारखंड की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। मधु कोड़ा भले ही सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके हों, लेकिन उनका नाम अभी भी बड़े राजनीतिक घोटालों से जुड़ता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हाईकोर्ट का यह फैसला उन सभी नेताओं और अधिकारियों के लिए संकेत है, जो भ्रष्टाचार के मामलों में कानून से बचने की कोशिश करते हैं। अब ट्रायल चलने से मधु कोड़ा पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मामला निचली अदालत में ट्रायल के लिए जाएगा। वहां सीबीआई अपने साक्ष्य पेश करेगी और बचाव पक्ष अपनी दलीलें देगा। अगर आरोप साबित होते हैं तो मधु कोड़ा को गंभीर कानूनी सजा भुगतनी पड़ सकती है।झारखंड हाईकोर्ट का यह आदेश साफ करता है कि बड़े राजनीतिक और आर्थिक घोटालों में अदालतें हस्तक्षेप करने से बचती हैं और ट्रायल को ही सही रास्ता मानती हैं। मधु कोड़ा के लिए यह फैसला बड़ा झटका है और आने वाले समय में यह झारखंड की राजनीति में भी हलचल पैदा कर सकता है।








