ईडी की देशभर में बड़ी कार्रवाई: कफ सिरप तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए 25 ठिकानों पर छापेमारी

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Ranchi: देशभर में जानलेवा कफ सिरप की अवैध खरीद–बिक्री से जुड़ी कड़ी को तोड़ने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार सुबह एक व्यापक अभियान छेड़ दिया। यह छापेमारी सुबह करीब सात बजे से शुरू हुई और इसमें झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा गुजरात के कुल 25 ठिकानों को निशाना बनाया गया। एजेंसी के मुताबिक अब तक मिली जानकारी में यह तस्करी नेटवर्क करोड़ों रुपये के काले कारोबार से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जिसमें कई व्यापारी, बिचौलिए और यहां तक कि वित्तीय सलाहकार भी शामिल हैं।

रांची में इस नेटवर्क का एक अहम केंद्र बताया जा रहा है—शैली ट्रेडर्स, जिसका नाम पहले भी कई संवेदनशील जांचों में सामने आ चुका है। ईडी की टीमें मंगलवार सुबह शैली ट्रेडर्स के प्रतिष्ठान और उससे जुड़े कारोबारी गतिविधियों की जांच में जुट गईं। बताया जाता है कि इस फर्म के माध्यम से जानलेवा कफ सिरप की सालाना खरीद-बिक्री का आंकड़ा पांच करोड़ रुपये से अधिक है।

रांची के तुपुदाना में शुभम जयसवाल के गोदाम पर छापेमारी
जांच का दूसरा बड़ा फोकस रहा रांची का तुपुदाना इलाका, जहां कफ सिरप कारोबारी शुभम जयसवाल के गोदाम और आवास पर ईडी ने एक साथ दबिश दी। टीम ने गोदाम से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और मोबाइल डिवाइस जब्त किए हैं। ईडी के अधिकारियों का मानना है कि शुभम जयसवाल इस पूरे तस्करी नेटवर्क में झारखंड का प्रमुख सप्लायर है, जो यूपी और गुजरात की सप्लाई चेन से भी जुड़ा हुआ है।

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जांच एजेंसी को इस बात की भी जानकारी मिली है कि कफ सिरप को ओवर-द-काउंटर दवाओं की तरह दिखाया जाता था, जबकि उसकी वास्तविक बिक्री नशे के कारोबारियों को की जाती थी। इस सिरप में कोडीन और नशीले रसायनों की अधिकता होने के कारण इसका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर होता रहा है।

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लखनऊ, बनारस से अहम सुराग मिलने की उम्मीद
ईडी का यह अभियान केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा। यूपी के लखनऊ, बनारस, जौनपुर और सहारनपुर में भी एक साथ छापेमारी की गई जहां कई थोक व्यापारियों और कथित स्टॉकिस्टों से दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। एजेंसी को उम्मीद है कि यूपी में की गई छापेमारी इस पूरे नेटवर्क के मुख्य वित्तीय प्रवाह का बड़ा खुलासा कर सकती है।

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इनमें से कई व्यापारी शैली ट्रेडर्स और शुभम जयसवाल से लिंक पाए गए हैं। शुरुआती जांच बताती है कि नकली बिलिंग, ओवर-इनवॉइसिंग और फर्जी GST नंबरों का इस्तेमाल करके कफ सिरप को बड़े पैमाने पर राज्यों के बीच भेजा जाता था।

सीए विष्णु अग्रवाल पर ईडी की विशेष नजर
ईडी की कार्रवाई में एक और नाम खास तौर पर उभरा है—चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल। ईडी ने उन्हें भी छापेमारी के दायरे में लिया है। शुरुआती शक है कि अग्रवाल ने कई संदिग्ध फर्मों के वित्तीय लेनदेन को ‘कानूनी दस्तावेज़’ का रूप देकर तस्करी नेटवर्क को मदद पहुंचाई होगी।

ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या अवैध कफ सिरप बिक्री का पैसा हवाला चैनलों के माध्यम से दूसरे राज्यों या विदेशों में भेजा गया।

ईडी की प्राथमिक जांच में बड़ा खुलासा
एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, खाताबही, लेनदेन रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए गए हैं। इन सभी का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाएगा ताकि तस्करी के पैमाने, नेटवर्क की गहराई और इसके प्रमुख सरगनाओं का पूरा खुलासा हो सके। ईडी का कहना है कि इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग की धारा के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं।

झारखंड में नशीली दवाओं का बड़ा गढ़?
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में नशीले कफ सिरप की खपत और तस्करी दोनों में तेजी आई है। इसका एक बड़ा कारण राज्य की भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती जिलों में फैला अनियमित व्यापार है। यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने झारखंड में कफ सिरप तस्करी पर बड़ी कार्रवाई की हो, लेकिन इस बार की छापेमारी का दायरा सबसे बड़ा बताया जा रहा है।

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