शिवराज पाटिल नहीं रहे: पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री के निधन से कांग्रेस में शोक, देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
मुनादी लाइव डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार की सुबह निधन हो गया। 91 वर्षीय पाटिल ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के अपने निवास देवघर में सुबह करीब 6:30 बजे अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे पाटिल पिछले कई महीनों से घर पर ही परिवार की निगरानी में उपचाररत थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई और नेताओं ने बड़े सम्मान के साथ उन्हें याद किया।
राजनीति में अनुशासन का दूसरा नाम थे शिवराज पाटिल
शिवराज पाटिल को देश की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है, जो अपने संयम, शालीनता और अनुशासन के लिए हमेशा मिसाल बने रहे। वह न सिर्फ कांग्रेस के वरिष्ठ चेहरे थे, बल्कि लोकसभा स्पीकर, केंद्रीय गृह मंत्री, लोकसभा उपाध्यक्ष, और पंजाब के राज्यपाल जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भी रहे।
उनका राजनीतिक सफर पांच दशकों से अधिक लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने संगठन और सरकार दोनों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। कांग्रेस के भीतर उन्हें एक ‘सिस्टमेटिक और सौम्य’ नेता के रूप में जाना जाता था।
नेताओं ने व्यक्त किया गहरा शोक
पाटिल के निधन की खबर फैलते ही कांग्रेस पार्टी से लेकर विपक्ष तक के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने शोक व्यक्त किया। राजस्थान से सांसद सुप्रिया सुले, रणदीप सिंह सुरजेवाला, वर्षा गायकवाड़, धीरज देशमुख जैसे कई नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
झारखंड से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा:
“शिवराज पाटिल एक अनुशासित और मर्यादित नेता थे। उनके निधन से कांग्रेस ने एक विचारशील, शांत और विवेकपूर्ण व्यक्तित्व खो दिया। भगवान से प्रार्थना करता हूं कि दुखी परिवार को शक्ति प्रदान करें।”
लातूर स्थित उनके घर पर नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग अंतिम दर्शन करने पहुंच रहे हैं और उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान
कांग्रेस पार्टी ने पाटिल के निधन को “एक युग का अंत” बताया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पाटिल न सिर्फ संगठन के महत्वपूर्ण स्तंभ थे, बल्कि नई पीढ़ी के नेताओं को मार्गदर्शन देने में भी अग्रणी भूमिका निभाते थे। कांग्रेस का कहना है कि पाटिल जैसे गंभीर, शांत और सौम्य नेताओं की आज राजनीति में बहुत कमी महसूस होती है। उनकी राजनीतिक समझ और संविधान की गहरी जानकारी उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी।
लातूर में शोक का माहौल
लातूर के देवघर क्षेत्र में पाटिल के निधन के बाद शोक की लहर है। उनका परिवार वर्षों से इसी निवास में रहता है। स्थानीय लोगों ने उन्हें एक सहज, मिलनसार और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति के रूप में याद किया। परिजनों के अनुसार, पाटिल पिछले कुछ महीनों से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी।
अंतिम संस्कार आज या कल
सूत्रों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार लातूर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कई राज्यों के मुख्यमंत्री अंतिम यात्रा में शामिल हो सकते हैं।






