सीएम हेमंत सोरेन के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी कॉल, कर्नाटक डिप्टी सीएम से अभद्र बातचीत — रांची में FIR दर्ज

Cyber Crime Jharkhand

साइबर सेल जांच में जुटी

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम का दुरुपयोग कर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनकी पत्नी को बार-बार फोन कर परेशान करने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यह घटना न केवल एक बड़ा साइबर अपराध है बल्कि इससे दो राज्यों के संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निजी सचिव की ओर से रांची के गोंदा थाना में आधिकारिक रूप से एफआईआर दर्ज कराई गई है।

कैसे हुआ फर्जी कॉल का खुलासा?
मुख्यमंत्री आवास में कार्यरत प्राइवेट असिस्टेंट जय प्रसाद ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को झारखंड का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बताकर कर्नाटक के डिप्टी सीएम को कॉल किया। फोन पर संदिग्ध व्यक्ति ने अनावश्यक, अभद्र और विचित्र प्रकार की बातचीत की, जिससे न केवल भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई बल्कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान भी किया गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि उसी मोबाइल नंबर से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी फोन किया गया और इसी प्रकार की बातें कर उन्हें भी परेशान किया गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब शिकायत मुख्यमंत्री आवास के माध्यम से शीर्ष स्तर के संज्ञान में लाई गई।

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रिकॉर्डिंग में संदिग्ध की आवाज़, खुद को ‘मुख्यमंत्री’ बता रहा था
शिकायत में कहा गया है कि कॉल की रिकॉर्डिंग सुरक्षित है, जिसमें आरोपी खुद को मुख्यमंत्री बताते हुए असामान्य तरीके से बात कर रहा है। बातचीत की भाषा और तरीका अत्यंत संदिग्ध है और यह स्पष्ट संकेत देता है कि आरोपी का मकसद भ्रम फैलाना, परेशानी उत्पन्न करना और संवैधानिक गरिमा से खिलवाड़ करना था।

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साइबर सेल और टेक्निकल टीम को मिली जांच की जिम्मेदारी
एफआईआर दर्ज होने के बाद रांची पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। पुलिस ने साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की है, जो निम्न बिंदुओं पर जांच कर रही है—

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
  • मोबाइल नंबर की लोकेशन
  • सिम कार्ड जारी करने वाले पहचान दस्तावेज
  • IP और इंटरनेट प्रोटोकॉल डेटा
  • टावर लोकेशन और पिछले कॉलिंग पैटर्न

पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ मजाक या छोटी घटना नहीं, बल्कि उच्चस्तरीय संस्थाओं और पदाधिकारियों तक पहुंचकर पहचान का दुरुपयोग करने की एक गंभीर कोशिश है।

क्या है आरोपी का मकसद? कई एंगल पर जांच
पुलिस शुरुआती जांच में कई संभावित पहलुओं पर विचार कर रही है—

  1. राजनीतिक शरारत या साजिश
  2. फ्रॉड कर पहचान का दुरुपयोग
  3. ब्लैकमेलिंग या डाटा फिशिंग का प्रयास
  4. मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति की हरकत
  5. साइबर सिंडिकेट की फर्जी कॉलिंग तकनीक

पुलिस ने बताया कि अगर यह कॉल किसी वॉइस क्लोनिंग तकनीक या इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) के जरिए किया गया है, तो उसकी तह तक पहुँचने के लिए और गहन जांच की जरूरत पड़ेगी।

पुलिस जल्द करेगी आरोपी की पहचान
टेक्निकल टीम के अनुसार, कॉल की लोकेशन और नंबर की डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया जा रहा है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि—

“अगले कुछ दिनों में आरोपी का चेहरा और पहचान साफ हो जाएगी।”

इस मामले को उच्चस्तरीय सुरक्षा और प्रोटोकॉल उल्लंघन से जुड़े संवेदनशील अपराध के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने जताई कड़ी नाराज़गी
मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की फर्जी पहचान, संवैधानिक पद का दुरुपयोग और अन्य राज्यों के अधिकारियों को परेशान करना गैरकानूनी और अस्वीकार्य है। यह घटना आने वाले दिनों में झारखंड और कर्नाटक पुलिस के बीच संयुक्त समन्वय का विषय भी बन सकती है, क्योंकि पीड़ित उच्च प्रोफ़ाइल पदाधिकारी हैं।

यह मामला झारखंड में बढ़ते साइबर क्राइम, डिजिटल पहचान के दुरुपयोग और संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करता है। रांची पुलिस की जांच इस बात पर प्रकाश डाल सकती है कि आरोपी का उद्देश्य क्या था और क्या यह एक व्यक्ति की हरकत है या किसी संगठित समूह की रणनीति।

जांच जारी है और जल्द ही आरोपी की पहचान सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।

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