धनबाद डीसी आदित्य रंजन पर गंभीर आरोप, तितली फाउंडेशन को ठेका देने में अनियमितता की शिकायत; मुख्य सचिव से ACB जांच की मांग
Dhanbad | Munadi Live Desk : धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन पर एक बार फिर विवादों के बादल मंडराने लगे हैं। उन पर एक गैर-सरकारी संस्था तितली फाउंडेशन को अनुचित रूप से काम देने के लिए टेंडर की शर्तें अपने अनुकूल बदलने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्य सचिव से की गई है, जिसमें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से निगरानी जांच की मांग भी की गई है।
शिकायत में लगे गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता राकेश कुमार द्वारा मुख्य सचिव को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि धनबाद जिले में कल्याण विभाग की इकाई द्वारा 200 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका, सहायिका और पोषण सखियों को प्रशिक्षण देने (Up-Skilling Program) के लिए एक टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर की शर्तों को जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) द्वारा तैयार किया गया था।
हालांकि, शिकायत के अनुसार इन शर्तों को इस तरह से निर्धारित किया गया कि काम सीधे तौर पर Management & Entrepreneurship and Professional Sector Skill Council (MEPSC) को मिले और उसके ट्रेनिंग पार्टनर तितली फाउंडेशन को प्रशिक्षण कार्य का जिम्मा सौंपा जा सके।
टेंडर शर्तों में बदलाव का आरोप
पत्र में कहा गया है कि धनबाद डीसी आदित्य रंजन के निर्देश पर टेंडर की शर्तों में बीच में बदलाव किया गया ताकि MEPSC और तितली फाउंडेशन के लिए रास्ता आसान हो जाए। यह आरोप लगाया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के मानकों के खिलाफ थी और इसका उद्देश्य किसी विशेष संस्था को लाभ पहुंचाना था। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इसी तरह की प्रक्रिया कोडरमा जिला में भी अपनाई गई थी, जब आदित्य रंजन वहां के उपायुक्त थे। वहां भी टेंडर प्रकाशित होने के बाद पात्रता शर्तों में बदलाव कर तितली फाउंडेशन को ही काम दिया गया था।
तितली फाउंडेशन और डीसी के संबंधों पर सवाल
शिकायतकर्ता ने पत्र में यह भी कहा है कि तितली फाउंडेशन के संस्थापक प्रांजल मोदी का उपायुक्त आदित्य रंजन से निजी संबंध है। आरोप है कि प्रांजल मोदी कई बार धनबाद आकर DMFT PMU टीम से मुलाकात कर चुके हैं और प्रशिक्षण कार्य को लेकर कई बैठकों में शामिल हुए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पूरा मामला सत्ता के दुरुपयोग और पद के प्रभाव का उदाहरण है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया को मनमाने तरीके से संचालित कर किसी एक संस्था को लाभ पहुंचाया गया।
मुख्य सचिव से ACB जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि इस पूरे मामले की ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) से गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष रूप से की जाए तो इस प्रकरण में कई अनियमितताएं और प्रशासनिक स्तर पर हुई हेराफेरी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि धनबाद में DMFT फंड से किए जाने वाले अधिकांश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है और यह मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
पूर्व के विवाद भी आए थे सामने
गौरतलब है कि उपायुक्त आदित्य रंजन पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं। कोडरमा में उनके कार्यकाल के दौरान भी टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप और फेवरिज़्म के आरोप लगे थे। हालांकि, तब किसी भी स्तर पर आधिकारिक जांच नहीं हो सकी थी।अब धनबाद में यह नया मामला सामने आने के बाद एक बार फिर से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
ACB जांच पर सबकी निगाहें
इस पूरे प्रकरण ने झारखंड प्रशासनिक जगत में हलचल मचा दी है। अब सबकी नजर मुख्य सचिव और ACB के कदम पर है कि क्या इस मामले की जांच वास्तव में प्रारंभ की जाती है या नहीं। अगर जांच होती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला झारखंड के नौकरशाही सिस्टम में भ्रष्टाचार की एक नई कड़ी को उजागर कर सकता है।
जनता और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सरकार से पारदर्शिता की मांग की है। कई संगठनों का कहना है कि DMFT फंड गरीब और वंचित वर्ग के हित में खर्च होने चाहिए, न कि किसी फिक्स्ड संस्था को फायदा पहुंचाने के लिए। जन प्रतिनिधियों ने भी इस प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा है कि धनबाद जैसे औद्योगिक जिले में विकास योजनाओं में किसी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन पर लगे आरोप झारखंड की नौकरशाही के लिए गंभीर चुनौती हैं। अब सबकी नजर मुख्य सचिव और ACB की कार्रवाई पर है — क्या वाकई जांच शुरू होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा।








