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एसीबी की डिजिटल जांच में बड़ा खुलासा, विनय-स्निग्धा गठजोड़ के नए लिंक बेनकाब

ACB Probe

Ranchi: रांची और दिल्ली में की गई लगातार छापेमारी के बाद झारखंड शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को बेहद महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। गुरुवार को दिल्ली में हुई तलाशी कार्रवाई के बाद अब एजेंसी ने विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के साथ-साथ उनके पुत्र सनत सिंह को भी संदेह के दायरे में शामिल कर लिया है।
एसीबी ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सनत सिंह को 15 दिसंबर 2025 को पूछताछ के लिए तलब किया है।

घर से बरामद डिजिटल साक्ष्यों ने खोले नए राज
वसंत विहार स्थित आवास से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्डड्राइव और चैट बैकअप की फॉरेंसिक जांच के बाद एजेंसी को चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। जांच रिपोर्ट बताती है कि स्निग्धा सिंह और सनत सिंह के संपर्क कई शीर्ष नौकरशाहों और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के सदस्यों तक फैले हुए थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री से यह भी संकेत मिलता है कि इन संपर्कों का उद्देश्य सामान्य सामाजिक बातचीत नहीं था, बल्कि इनमें संदिग्ध प्रकृति की मुलाकातों और लेनदेन के उल्लेख मिले हैं।

एसीबी सूत्रों के अनुसार, कई डिजिटल संचार “कोड भाषा” में थे, जिससे आशंका गहरी होती है कि भ्रष्टाचार के पैसों का नेटवर्क न केवल विस्तृत था, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा था।

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विनय चौबे—विनय सिंह—स्निग्धा गठजोड़ का दायरा और बड़ा निकला
एसीबी सूत्र बताते हैं कि अब तक की जांच में यह साफ होता जा रहा है कि यह गठजोड़ केवल शराब घोटाले तक सीमित नहीं था, बल्कि अवैध धन निवेश, बेनामी संपत्ति खरीद, विदेश यात्राओं के माध्यम से मनी रूटिंग, राजनीतिक दबाव और निर्णयों में प्रभाव जैसे कई बड़े पहलुओं से जुड़ा हुआ था।

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डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसी चैट्स मिली हैं जिनमें कुछ महत्वपूर्ण बैठकों, विदेशी यात्राओं और वित्तीय लेनदेन के संदिग्ध विवरण हैं। इसमें सनत सिंह की भूमिका “समन्वयक” की तरह दिख रही है, जो पैरेंट्स और अन्य प्रभावशाली संपर्कों के बीच एक लिंक की तरह काम कर रहा था।

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15 दिसंबर को होने वाली पूछताछ बन सकती है जांच का टर्निंग पॉइंट
एसीबी का मानना है कि स्निग्धा और सनत के फोन से मिले डेटा से मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क को समझने में मदद मिलेगी।
इस पूछताछ में एजेंसी का मुख्य फोकस होगा:

  • अवैध कमाई को कहां–कहां और किस-किस के माध्यम से निवेश किया गया
  • बेनामी संपत्तियों के असली मालिक कौन हैं
  • राजनीतिक परिवारों से संपर्क का उद्देश्य क्या था
  • विदेश यात्राओं का खर्च किस स्रोत से हुआ
  • क्या इन संपर्कों का प्रभाव सरकारी नीतियों या अधिकारियों के निर्णयों पर पड़ा

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इस केस की जांच कई नए नामों को सामने ला सकती है और कुछ बड़े खुलासों की संभावना भी जताई जा रही है।

विनय चौबे केस के बाद अब यह जांच भारी राजनीतिक तूफान की ओर?
विनय चौबे, विनय सिंह और स्निग्धा सिंह पर पहले से करोड़ों के शराब घोटाले, भूमि निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। रविवार को एसीबी द्वारा विनय चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता से की गई 10 घंटे की पूछताछ के बाद अब दिल्ली में डिजिटल रेड इस मामले को और बड़ा बना रही है। राजनीतिक हलकों में भी यह जांच चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड में कुछ राजनीतिक परिवारों के नाम आने की संभावना ने हलचल तेज कर दी है।

एसीबी अब बड़े पैमाने पर कनेक्शन मैपिंग करने में जुटी
डिजिटल डेटा के आधार पर एजेंसी अब कॉल ग्राफ एनालिसिस, चैट पैटर्न स्टडी और वित्तीय ट्रेल डिकोडिंग कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस झारखंड के सबसे बड़े करप्शन रैकेट्स में से एक बन सकता है।

सनत सिंह की पूछताछ से उम्मीद है कि यह नेटवर्क किस तरह काम करता था, कौन–कौन इसके लाभार्थी थे और कितनी संपत्तियां कब–कब खरीदी गईं — इन सभी पर बड़ा खुलासा हो सकता है।

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