झारखंड को जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से मिले 300 करोड़, राज्य भी देगा 300 करोड़
600 करोड़ से रफ्तार पकड़ेंगी पेयजल योजनाएं, केंद्र से 300 करोड़ की राशि जारी
अधूरी योजनाएं होंगी पूरी, संवेदकों के बकाया भुगतान का भी खुलेगा रास्ता
रांची: झारखंड में लंबे समय से अधूरी पड़ी पेयजलापूर्ति योजनाओं और जल जीवन मिशन के काम को अब रफ्तार मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 300 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से फंड मिलने के बाद अब राज्य सरकार भी अपने हिस्से के 300 करोड़ रुपये जारी करेगी। इस तरह झारखंड में पेयजल योजनाओं के लिए कुल 600 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। इस राशि से राज्य में फंड और भुगतान की कमी के कारण प्रभावित हो रही पेयजल योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ लंबे समय से अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा पेयजल योजनाओं से जुड़े संवेदकों के लंबित भुगतान के निपटारे का भी रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
केंद्र से 300 करोड़ मिलने के बाद राज्य भी देगा 300 करोड़
जल जीवन मिशन के तहत झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाने के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। हालांकि, फंड की उपलब्धता और भुगतान से जुड़ी समस्याओं के कारण कई योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है।अब केंद्र सरकार से 300 करोड़ रुपये की राशि मिलने के बाद राज्य सरकार भी अपने हिस्से की 300 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने की तैयारी में है। दोनों मदों को मिलाकर 600 करोड़ रुपये की राशि पेयजलापूर्ति योजनाओं पर खर्च की जा सकेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस अतिरिक्त फंड से रुकी हुई योजनाओं के काम में तेजी आएगी और जिन योजनाओं का निर्माण कार्य अधूरा है, उन्हें पूरा करने की दिशा में ठोस प्रगति होगी।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र से मांगी थी राशि
दरअसल, पिछले दिनों नई दिल्ली में आयोजित ‘विभागीय शिखर सम्मेलन 2026’ के दौरान झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र सरकार के सामने राज्य में जल जीवन मिशन से जुड़ी योजनाओं के लिए तत्काल फंड जारी करने की मांग रखी थी।मंत्री ने केंद्र से लंबित राशि जारी करने का आग्रह किया था, ताकि राज्य में प्रभावित हो रही पेयजल योजनाओं को गति दी जा सके। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से झारखंड के लिए 300 करोड़ रुपये जारी किए गए। केंद्र से राशि मिलने के बाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार हर हाल में पेयजल योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से मिली राशि और राज्य सरकार के अंशदान से योजनाओं के काम में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
अधूरी योजनाओं को पूरा करने पर रहेगा जोर
600 करोड़ रुपये की उपलब्ध राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन योजनाओं को गति देने में किया जाएगा, जिनका काम फंड या भुगतान की समस्या के कारण प्रभावित हुआ है। राज्य में कई पेयजल योजनाएं ऐसी हैं, जिनका निर्माण कार्य शुरू होने के बाद विभिन्न कारणों से पूरा नहीं हो सका है। नई राशि मिलने के बाद इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल नई योजनाएं शुरू करना ही नहीं, बल्कि पहले से चल रही और अधूरी योजनाओं को पूरा करना भी है, ताकि ग्रामीण इलाकों में लोगों को जल्द से जल्द नियमित पेयजल की सुविधा मिल सके।
संवेदकों के बकाया भुगतान का भी रास्ता साफ
पेयजल योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़े संवेदकों का भुगतान भी लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। फंड की कमी के कारण कई कार्यों का भुगतान प्रभावित होने की बात सामने आई है।अब केंद्र और राज्य से मिलाकर 600 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बाद लंबित भुगतान के निपटारे की उम्मीद भी बढ़ी है। भुगतान होने से संवेदकों के लिए लंबित कार्यों को आगे बढ़ाना आसान होगा और निर्माण कार्यों की गति में भी सुधार आ सकता है। हालांकि, किस संवेदक को कितना भुगतान किया जाएगा और किस योजना को कितनी राशि मिलेगी, इसका अंतिम विवरण संबंधित विभाग की ओर से जारी किया जाना बाकी है।
जल जीवन मिशन की योजनाओं को समय पर पूरा करने का लक्ष्य
झारखंड सरकार का लक्ष्य जल जीवन मिशन के तहत चल रही पेयजल योजनाओं को समय पर पूरा करना है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक परिवारों तक सुरक्षित और नियमित पेयजल की सुविधा पहुंचाई जा सके। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र सरकार से शेष लंबित राशि भी जल्द जारी करने का आग्रह किया है। सरकार का मानना है कि अगर लंबित फंड समय पर उपलब्ध होता है, तो पेयजल योजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। फिलहाल केंद्र से 300 करोड़ रुपये जारी होने और राज्य की ओर से 300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने के बाद कुल 600 करोड़ रुपये का फंड पेयजल योजनाओं के लिए उपलब्ध होने जा रहा है। ऐसे में अब विभाग के सामने इस राशि का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए रुकी हुई योजनाओं को जमीन पर गति देने और अधूरे कामों को पूरा करने की चुनौती होगी।





