दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, सत्य निकेतन हादसे के बाद 1,120 PG की जांच; 52 इमारतें जर्जर
सत्य निकेतन में 7 मौतों के बाद दिल्ली सरकार और MCD सख्त
अवैध निर्माण पर सीलिंग-डिमोलिशन तेज; PG के लिए नई नीति की तैयारी
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में PG भवन गिरने से सात लोगों की मौत के बाद छात्रों के सुरक्षित आवास का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। हादसे के बाद दिल्ली सरकार, नगर निगम और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर कदम तेज कर दिए हैं। दिल्ली नगर निगम ने राजधानी के अलग-अलग इलाकों में PG आवासों का व्यापक सर्वे शुरू किया है। सर्वे के पहले चरण में 1,120 PG परिसरों की पहचान की गई है, जहां 20 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। इनमें से 52 इमारतें जर्जर हालत में मिली हैं। हालांकि, फिलहाल इन इमारतों को आधिकारिक रूप से खतरनाक घोषित नहीं किया गया है। संबंधित भवन मालिकों को मरम्मत कराने के निर्देश और आवश्यक सलाह दी गई है।
1,120 PG की जांच, 52 इमारतें मिलीं जर्जर
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने छात्र और किराएदारों के लिए इस्तेमाल होने वाले PG परिसरों की स्थिति का आकलन शुरू किया है। शुरुआती सर्वे में 1,120 PG परिसरों को चिन्हित किया गया है। इन परिसरों में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रह रहे हैं। सर्वे के दौरान 52 इमारतों की हालत जर्जर पाई गई। हालांकि, इन सभी को तत्काल खतरनाक घोषित नहीं किया गया है। MCD की ओर से संबंधित मालिकों को भवन की स्थिति सुधारने और जरूरी मरम्मत कराने की सलाह दी गई है। आगे की जांच में यदि किसी भवन में गंभीर संरचनात्मक कमी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
सत्य निकेतन में PG भवन गिरने की घटना ने दिल्ली में निजी छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए रहते हैं और उनमें से कई निजी PG या हॉस्टल में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल केवल भवन की मजबूती का नहीं, बल्कि फायर सेफ्टी, अवैध निर्माण, आपातकालीन निकासी और भवन की निगरानी का भी है। हादसे के बाद अब सरकारी एजेंसियों का फोकस ऐसे आवासों की पहचान पर है, जहां नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
PG के लिए नई नीति लाने की तैयारी
दिल्ली सरकार निजी PG और छात्रावासों को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए नई नीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में PG के पंजीकरण और नगर निकाय से लाइसेंस जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा संचालकों और रहने वाले लोगों का पुलिस सत्यापन, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और फायर सेफ्टी से जुड़े प्रमाणपत्र भी अनिवार्य किए जाने पर विचार किया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने पर छात्रों और अभिभावकों को यह पता चल सकेगा कि जिस PG में उनका बच्चा रह रहा है, वह नियमों के तहत पंजीकृत और सुरक्षा मानकों को पूरा करता है या नहीं।
छात्रों के लिए सार्वजनिक पोर्टल की तैयारी
प्रस्तावित नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा PG से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करना भी हो सकता है। सरकार की तैयारी है कि पंजीकृत PG की जानकारी छात्रों और अभिभावकों के लिए एक सार्वजनिक वेब पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए। इससे छात्र कमरे या PG लेने से पहले उसके पंजीकरण और सुरक्षा से संबंधित जानकारी देख सकेंगे। इससे अनधिकृत या नियमों का पालन नहीं करने वाले PG संचालकों पर भी दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग और डिमोलिशन
छात्र आवासों की जांच के साथ ही दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। लक्ष्मी नगर, न्यू अशोक नगर और पांडव नगर जैसे इलाकों में सीलिंग और डिमोलिशन अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी एजेंसियां ऐसे निर्माणों को चिन्हित कर रही हैं, जहां भवन नियमों का उल्लंघन किया गया है या संरचना में सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां हैं। हालांकि, किसी भवन के खिलाफ कार्रवाई का आधार उसकी स्थिति और संबंधित नियमों का उल्लंघन होगा। केवल PG के रूप में इस्तेमाल होने के कारण किसी भवन को अवैध नहीं माना जा सकता।
NHRC ने भी जताई चिंता
सत्य निकेतन हादसे के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्याप्त और किफायती छात्रावासों की कमी को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष से दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ समन्वय कर चार सप्ताह के भीतर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस व्यवस्था तैयार करना है।
अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, सुरक्षित आवास व्यवस्था पर जोर
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्रों के आवास से जुड़े एक बड़े सवाल को सामने ला दिया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG, किराए के कमरों और हॉस्टलों में रहते हैं। ऐसे में केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। अब चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें PG का पंजीकरण हो, भवन की सुरक्षा जांच नियमित हो, फायर सेफ्टी सुनिश्चित हो और नियम तोड़ने वाले संचालकों की जवाबदेही तय हो। 1,120 PG परिसरों के शुरुआती सर्वे और 52 जर्जर इमारतों की पहचान के बाद आने वाले चरणों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यदि प्रस्तावित नई नीति लागू होती है, तो छात्रों और अभिभावकों के लिए सुरक्षित आवास चुनना आसान हो सकता है। सत्य निकेतन हादसे के बाद उठाए जा रहे कदमों से साफ है कि अब दिल्ली में छात्र आवासों को लेकर फोकस अवैध निर्माण पर कार्रवाई से आगे बढ़कर सुरक्षित, पंजीकृत और जवाबदेह PG व्यवस्था तैयार करने पर है।






