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JPSC Scam: पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से दूसरे दिन भी 8 घंटे पूछताछ, 31 जुलाई को फिर किया गया तलब

L Khiangte CID Questioning

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। इसी सिलसिले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (CID) ने लगातार दूसरे दिन भी लंबी पूछताछ की। बुधवार को CID मुख्यालय में उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उन्हें 31 जुलाई को एक बार फिर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, CID अब परीक्षा प्रक्रिया, एजेंसी चयन और शिकायतों के निस्तारण से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।

31 जुलाई को जरूरी दस्तावेजों के साथ बुलाया
जानकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान CID अधिकारियों ने एल. खियांग्ते से कई अहम बिंदुओं पर जवाब मांगे। साथ ही उन्हें 31 जुलाई को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ फिर से उपस्थित होने को कहा गया है। हालांकि CID ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि किन दस्तावेजों की मांग की गई है और पूछताछ किन विशेष बिंदुओं पर केंद्रित रही।

जांच के बीच दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की शिकायतों की जांच शुरू होने के बाद एल. खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे को लेकर उन्होंने कहा था कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया।

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क्या हैं एल. खियांग्ते पर आरोप?
जांच के दौरान एल. खियांग्ते पर कई गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है। आरोप है कि

  • 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने समय पर कार्रवाई नहीं की।
  • एक अभ्यर्थी ने लगभग 400 OMR शीटों से संबंधित कथित अनियमितताओं की शिकायत उन्हें भेजी थी, लेकिन उस पर संज्ञान नहीं लिया गया।
  • 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और अन्य परीक्षाओं के संचालन का जिम्मा कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को सौंपा गया।
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इसके अलावा जांच एजेंसी पहले एल. खियांग्ते के कांके स्थित सरकारी आवास पर भी तलाशी ले चुकी है। हालांकि तलाशी के दौरान क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

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सभी आरोपों को बताया निराधार
एल. खियांग्ते ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया है। हाल के मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि JPSC अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सभी निर्णय निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत लिए। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा संचालन का जिम्मा नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि JPSC में उनका उद्देश्य प्रशासनिक सुधार लागू करना और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं गोपनीय बनाना था।

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“निष्पक्ष जांच के लिए छोड़ा पद”
एल. खियांग्ते का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से अध्यक्ष पद छोड़ा ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके और वे पूरी तरह जांच में सहयोग कर सकें। उन्होंने यह भी मांग की है कि केवल 14वीं JPSC परीक्षा ही नहीं, बल्कि आयोग की पूर्व की भर्ती परीक्षाओं की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जांच जारी, निष्कर्ष अभी बाकी
CID फिलहाल दस्तावेजों, बयानों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। जांच एजेंसी की ओर से अभी तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका या दायित्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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