साइबर ठगी से कैसे बचें? कैंब्रियन स्कूल में 60 शिक्षकों को दी गई साइबर सेफ्टी की ट्रेनिंग
बच्चों को तकनीक से दूर रखना समाधान नहीं, साइबर बुलिंग और फिशिंग से बचाव की जानकारी
रांची: डिजिटल दौर में साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। इसी उद्देश्य से कैंब्रियन पब्लिक स्कूल, कांके रोड, रांची में शिक्षकों के लिए ‘साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी’ विषय पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और शिक्षकों को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के साथ-साथ बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने के तरीके बताए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय की निदेशक सह प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर ने कहा कि वर्तमान समय में जीवन के हर क्षेत्र में सतर्कता जरूरी है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना भी आवश्यक हो गया है, ताकि लोग खुद को मानसिक और आर्थिक नुकसान से बचा सकें। उन्होंने विशेष रूप से व्यक्तिगत और बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने से पहले उसके स्रोत की प्रमाणिकता की जांच करने पर जोर दिया।
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले करें सत्यापन
परमजीत कौर ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए आज कई तरह की सेवाएं और सुविधाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। लेकिन इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति, वेबसाइट, ई-मेल या डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ निजी जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी लोगों को साइबर ठगी के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक परेशानी से बचा सकती है। खासकर बैंकिंग से जुड़ी जानकारी के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
कार्यक्रम का किया गया उद्घाटन
क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय की निदेशक सह प्राचार्या श्रीमती परमजीत कौर, रिसोर्स पर्सन श्रीमती प्रियदर्शिनी सवाई, प्रभंजन कुमार और एसटीएनसी सौरभ कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को साइबर सुरक्षा से जुड़े मौजूदा खतरों और उनसे बचाव के व्यावहारिक तरीकों के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में कैंब्रियन पब्लिक स्कूल के अलावा शहर के अन्य विद्यालयों के शिक्षक भी शामिल हुए।
बच्चों को तकनीक से दूर रखना समाधान नहीं
कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन प्रियदर्शिनी सवाई और प्रभंजन कुमार ने कहा कि वर्तमान समय सूचना क्रांति का युग है। आज इंटरनेट और आधुनिक तकनीक शिक्षा एवं दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में बच्चों को इंटरनेट और सूचना के आधुनिक साधनों से पूरी तरह अलग रखना उनके समग्र विकास के लिए उचित समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि बच्चों को तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित, जिम्मेदार और सतर्क तरीके से करना सिखाया जाए। प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सुरक्षा संबंधी बुनियादी नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। शिक्षक बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं, इसलिए उन्हें साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी देकर वे विद्यार्थियों को भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए जागरूक कर सकते हैं।
साइबर बुलिंग और फिशिंग से बचाव की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की गई। इनमें साइबर बुलिंग, फिशिंग और सुरक्षित पासवर्ड निर्माण जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रशिक्षकों ने बताया कि साइबर बुलिंग के जरिए किसी व्यक्ति को ऑनलाइन परेशान या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा सकता है। वहीं फिशिंग के माध्यम से साइबर अपराधी लोगों को फर्जी लिंक, ई-मेल या संदेश के जरिए संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए भ्रमित कर सकते हैं। इसके अलावा मजबूत पासवर्ड बनाने और डिजिटल अकाउंट को सुरक्षित रखने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

60 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम में कैंब्रियन पब्लिक स्कूल सहित रांची शहर के अन्य विद्यालयों के करीब 60 शिक्षक शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी हासिल की और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक और जिम्मेदार होना चाहिए।
शिक्षकों की भूमिका अहम
स्कूलों में बच्चों के डिजिटल व्यवहार को सुरक्षित बनाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थी पढ़ाई, संचार, मनोरंजन और अन्य गतिविधियों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर उन्हें शुरुआत से ही साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी दी जाए, तो वे ऑनलाइन जोखिमों से बेहतर तरीके से बच सकते हैं। कार्यक्रम में शिक्षकों को यह संदेश दिया गया कि डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने के साथ उसके जोखिमों को समझना भी जरूरी है। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान व्यक्ति के साथ निजी जानकारी साझा करने या कमजोर पासवर्ड इस्तेमाल करने जैसी लापरवाहियों से बचना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका आभा सहाय ने किया। आयोजन के माध्यम से शिक्षकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई।

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