16वीं कोयला नीलामी शुरू, झारखंड समेत 9 राज्यों के 25 ब्लॉक शामिल
धनबाद: देश में वाणिज्यिक कोयला खनन को बढ़ावा देने के लिए कोयला मंत्रालय ने कोयला खदान नीलामी के 16वें चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस चरण में झारखंड समेत नौ राज्यों के 25 कोयला ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन 25 कोयला ब्लॉकों में 21 पूरी तरह खोजे गए और चार आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉक शामिल हैं। इन खदानों की नीलामी का उद्देश्य घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और खनन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
नौ राज्यों के 25 कोयला ब्लॉक नीलामी में
16वें चरण की नीलामी में शामिल कोयला ब्लॉक झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में स्थित हैं। कोयला मंत्रालय की वाणिज्यिक कोयला खनन नीति के तहत नीलामी के जरिए आवंटित खदानों से उत्पादित कोयले की बिक्री की अनुमति दी जाती है। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से खदानों का आवंटन किया जाता है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और निवेश को बढ़ावा देने के साथ घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पांच कंपनियां बोली प्रक्रिया में शामिल
16वें चरण की नीलामी में झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड समेत पांच कंपनियों ने बोली प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। अन्य बोलीदाताओं में सीजी साइन-गैस एंड मिनरल्स लिमिटेड, क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, गेलहेंट इस्पात लिमिटेड और द सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल बोलीदाताओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार संबंधित कोयला ब्लॉकों के विकास और उत्पादन की जिम्मेदारी दी जाएगी।
छह खदानों के सफल बोलीदाताओं को CMDPA
कार्यक्रम के दौरान पहले के नीलामी चरणों में आवंटित छह कोयला खदानों के सफल बोलीदाताओं को कोयला खदान विकास एवं उत्पादन समझौता यानी CMDPA पत्र भी सौंपे गए। इन छह खदानों में तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगरी ताल-2 और पीकॉक कोयला ब्लॉक शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन छह खदानों में करीब 1,504 मिलियन टन भूगर्भीय कोयला भंडार उपलब्ध है। इनकी संयुक्त अधिकतम उत्पादन क्षमता लगभग 11.62 मिलियन टन प्रति वर्ष आंकी गई है।
₹1,743 करोड़ निवेश की संभावना
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, इन छह खदानों के विकास और संचालन से करीब ₹1,743 करोड़ के पूंजी निवेश की संभावना है। इसके साथ ही इन परियोजनाओं से कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 15,700 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। इससे संबंधित क्षेत्रों में खनन गतिविधियों के साथ परिवहन, सेवाओं और अन्य सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर
वाणिज्यिक कोयला खनन की नीलामी व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी। इसके तहत निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए कोयला ब्लॉक आवंटित किए जाते हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना और कोयले के आयात पर निर्भरता कम करना है। 16वें चरण में झारखंड समेत नौ राज्यों के 25 कोयला ब्लॉकों को नीलामी के लिए शामिल किया गया है। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल बोलीदाताओं को खदानों के विकास और उत्पादन की जिम्मेदारी दी जाएगी। झारखंड के लिए यह नीलामी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है और धनबाद समेत कई जिलों की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोयला खनन से जुड़ा हुआ है।
झारखंड पर क्या होगा असर?
झारखंड में कोयला खनन का विस्तार होने से राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। नए कोयला ब्लॉकों के विकास से खनन के साथ परिवहन, मशीनरी, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। खनन से मिलने वाले वैधानिक राजस्व का लाभ राज्य को मिल सकता है, हालांकि इसकी वास्तविक राशि संबंधित ब्लॉकों के आवंटन, उत्पादन क्षमता और लागू नियमों पर निर्भर करेगी। वहीं, नए खनन प्रोजेक्टों के साथ भूमि, पर्यावरण, वन क्षेत्र और स्थानीय आबादी से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं। ऐसे में झारखंड में इन परियोजनाओं का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि विकास के साथ स्थानीय लोगों के हित, रोजगार, पुनर्वास और पर्यावरणीय मानकों का किस तरह पालन किया जाता है।
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