गुमला में शर्मनाक वारदात: सरहुल से लौट रही नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा

POCSO Act

गुमला/झारखंड: झारखंड के गुमला जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां सरहुल जैसे पवित्र पर्व के दिन एक नाबालिग बच्ची को दरिंदगी का शिकार बनाया गया। टोटो थाना क्षेत्र के ग्राम किता में तीन युवकों ने मिलकर नाबालिग को जंगल में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

सरहुल से लौट रही थी बच्ची, रास्ते में बनाया शिकार
घटना 11 अप्रैल की दोपहर की है। जानकारी के अनुसार पीड़िता सरहुल पर्व मनाकर सुबह अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान गांव के ही तीन युवकों ने उसे जबरन पकड़ लिया और सुनसान जंगल-झाड़ी की ओर ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। यह वारदात न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

मां की शिकायत पर तुरंत दर्ज हुआ मामला
पीड़िता की मां के लिखित आवेदन के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गुमला थाना कांड संख्या 133/2026 दर्ज किया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2), 351(2) और POCSO Act की धारा 4/6 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है, प्रदीप तुरी (24 वर्ष), सुरेश उरांव (22 वर्ष) और मुकेश लोहरा (29 वर्ष) । तीनों आरोपी उसी गांव के रहने वाले हैं, जिससे यह मामला और भी चिंताजनक हो जाता है।

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फॉरेंसिक जांच और मेडिकल परीक्षण
घटनास्थल की गंभीरता को देखते हुए रांची से फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है, जो वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटा रही है। वहीं पीड़िता और आरोपियों का मेडिकल परीक्षण सदर अस्पताल गुमला में कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट जांच में अहम भूमिका निभाएगी।

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समाज में आक्रोश, सुरक्षा पर सवाल
इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। एक तरफ सरहुल जैसे पर्व की खुशियां थीं और दूसरी तरफ ऐसी दरिंदगी ने पूरे समाज को झकझोर दिया ।सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है — क्या गांवों में भी अब बेटियां सुरक्षित नहीं हैं?

सख्त सजा की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और सख्त सजा ही अपराध पर लगाम लगा सकती है। गुमला की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। यह बताती है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ बिना किसी देरी के कठोर कार्रवाई जरूरी है

नोट: पीड़िता की पहचान कानूनन गोपनीय रखी गई है।

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